शंखनाद नव युग का

रात के डेढ़ बजे फोन की घंटी ने कंचन को गहरी नींद से जगा दिया. इस वक्त फोन कौन कर सकता है? दूसरी ओर से आशीष की उत्साहित आवाज़ सुनाई दी.
“कांची, अभी सोई तो नहीं थी?”
“नहीं, इतनी जल्दी कैसे सो सकती हूँ. अभी वक्त ही कितना हुआ है, बस रात के डेढ़ ही तो बजे हैं.”
“वही तो, मै जानता था, तू अभी जाग कर कोई कविता लिख रही होगी. एक अच्छी खबर है, तुझे सुनाए बिना सो नही सकता था.”कंचन यानी कांची के स्वर का व्यंग्य आशीष को छू भी नहीं गया.
‘देख आशू, हम गहरी नींद में सो रहे थे, अब बता इस वक्त फोन क्यों किया?”
“अच्छी खबर है, अमरीका से मेरे दोस्त ने इन्फार्म किया है, फिज़िक्स में रिसर्च करने के लिए मेरी एप्लीकेशन एक्सेप्ट हो गई है. अब बस अगला सेशन शुरू होते ही मै अमरीका के लिए उड़ जाऊंगा.”
“कांग्रेट्स, बस इसी खबर के लिए मुझे जगा दिया. मुश्किल से सो पाई थी, सोचती रही, कल रोहन को कड़ी से कड़ी सज़ा दिलवानी है. अगर रजिस्ट्रार नही माने तो वाइस चांसलर से ऐक्शन लेने के लिए मिलने जाना पडेगा.”कांची ने नाराजगी से कहा.
“देख कांची, तू अपनी नेतागिरी छोड़ जल्दी से अपना एम ए कम्प्लीट कर डाळ, मेरे साथ अमरीका जाने के लिए तेरी नेतागिरी नही एम ए की फर्स्ट डिवीज़न चाहिए. देर की तो पछताएगी.”
“थैंक्स फ़ॉर योर एडवाइस, अपना अच्छा-बुरा समझती हूँ. जनाब अभी अमरीका गए नहीं और उड़ान भरने लगे.” कांची ने फोन काट दिया.
कंचन और आशीष के घर पास-पास थे. दोनों परिवारों में इतनी घनिष्ठता थी कि परिवारों के बच्चे अपना-पराया जान ही न सके. आशीष उम्र में कंचन से तीन वर्ष बड़ा था, पर कंचन हमेशा उस पर हावी रहती. कांची की हर छोटी-बड़ी बात मान लेने में ही आशीष की खैर थी.
आशू, कल प्लाज़ा में रणबीर कपूर की फिल्म लग रही है. हमें पहले शो के चार टिकट चाहिए.”
“कमाल करती है, जानती है फर्स्ट डे, फर्स्ट शो में कितनी भीड़ होती है मुझे धक्के नहीं खाने है.”
मेरी फ्रेंड्स ने मुझे चैलेंज दिया है, अब टिकट ना मिलने पर मेरी कितनी इन्सल्ट होगी, क्या मेरी इन्सल्ट तुम्हे अच्छी लगेगी? ठीक है मुझे ही धक्के खाने जाना होगा.” भोलेपन से कांची कहती.
इस बार टिकट ला दूंगा, पर आगे से ऐसा चैलेन्ज अपने भरोसे लेना, मेरे भरोसे रहेगी तो चैलेंज पूरा नहीं कर सकेगी. इसके बावजूद कांची की हर जिद उसे पूरी करनी ही पड़ती..
“थैंक्स, आशू तुम कितने अच्छे हो.”कांची की मुस्कान पर आशू न्योछावर हो जाता.
कंचन कवितायेँ लिखती और सबसे पहले हर कविता आशीष को सुननी पड़ती. उसकी कविता आशीष को ना सिर्फ सुननी पडतीं बल्कि उसकी खूब तारीफ़ भी करनी होती. दोनों उम्र के उस पड़ाव पर थे जहां प्यार हो जाना स्वाभाविक बात होती, पर दोनों ही इस बदलाव से अनजान थे. इतना ज़रूर था दोनों को एक-दूसरे का साथ अच्छा लगता. अपनी खुशी और परेशानी दोनों शेयर करते.
एम् एस सी में फर्स्ट डिवीज़न के बाद अमरीका में रिसर्च करके वहीं काम करने का आशीष का सपना था. वैसे तो उसने पार्ट टाइम जॉब ले लिया था, पर अपनी रिसर्च के लिए अमरीका की यूनीवार्सिटीज़ में ऐप्ळाई कर रहा था. आज जैसे ही उसे अमरीका में अपने ऐडमीशन की खबर मिली, उस खुशखबरी को कांची को सुनाने से नहीं रोक सका.
दूसरी ओर अपनी मेधा के कारण कंचन एम् ए फाइनल की शान थी. अपनी वाक् पटुता और निर्भीक स्वभाव की वजह से वह यूनीवर्सिटी यूनियन की सेक्रेटरी चुनी गई थी. आशीष कांची के कवयित्री रूप का बड़ा प्रशंसक था, पर यूनीवर्सिटी की राजनीति में कांची का हर छोटी-बड़ी लड़ाई में आगे रहना आशू को अच्छा नहीं लगता था.
कल ही कांची ने बताया था रजिस्ट्रार के बेटे रोहन ने बी ए पार्ट वन की लड़की रेशमा की चुन्नी सबके सामने उसके कंधे से खींच हवा में उड़ा दी थी. घुटनों में मुंह छिपाए रोती रेशमा के चारों ओर मोटर बाइक घुमाते हुए अपने साथियों के साथ गाता रहा-
 “हवा में उड़ता जाए मेरा लाल दुपट्टा मलमल का हो जी-- -“ कुछ शरीफ लड़कों की मदद से रेशमा का दुपट्टा मिल सका था, पर रेशमा की आँखों से बहते आंसुओं का रोहन पर कोई असर नहीं पडा.
कांची तक जब यह बात पहुंची, उसका खून उबल पड़ा. सीधे रजिस्ट्रार के ऑफ़िस में जाकर रोहन के खिलाफ लिखित शिकायत करके कड़ी से कड़ी कार्रवाई का अनुरोध किया था.
रजिस्ट्रार ने बात रफा-दफा करने के लिए कहा था-
“देखिए मिस कंचन, रैगिंग में थोड़ा बहुत हंसी-मज़ाक चलता ही है. मै रोहन को समझाऊंगा. वह रेशमा से माफी मांग लेगा. आगे से वह ऎसी कोई गलती नहीं करेगा.”
“माफ़ कीजिए सर, पर रोहन अपनी गुंडागर्दी के लिए मशहूर है. उसकी इस हरकत की वजह से रेशमा के माता-पिता उसकी पढाई बंद करवाना सोच रहे हैं. उन्हें डर है बेटी की बदनामी के बाद उसकी शादी नही हो पाएगी. उनकी इज्ज़त पर बन आएगी,”
“”आप तो राई का पहाड़ बना रही हैं. अगर रेशमा के पेरेंट्स इतने दकियानूसी ख्यालातों के हैं तो उन्हें बेटी को किसी लड़कियों के कॉळेज में भेजना चाहिए था.”
“ठीक है, सर. अगर आप कोई कड़ा ऐक्शन नही ले सकते तो मुझे यूनियन में यह बात उठानी होगी.”
 “आप बेकार की जिद पर अड़ी हुई हैं, क्या सज़ा चाहती हैं आप, उसे देश-निकाला दे दूं या फांसी   की सज़ा मिलनी चाहिए?”रजिस्ट्रार के स्वर में इकलौते बेटे की शिकायत पर आक्रोश स्पष्ट था.
 “देश-निकाला तो आपके हाथ में नहीं है, पर उसे सस्पेंड तो किया जा सकता है, शायद आप नहीं जानते रोहन के नाम से स्टूडेंट्स के बीच कितना खौफ है. उसे ऎसी सज़ा मिलनी चाहिए ताकि वह समझ सके कि वह भी एक आम विद्यार्थी है.”
“ठीक है, देखता हूँ क्या कर सकता हूँ. मेरा बहुत समय बर्बाद हो गया, अब मुझे एक ज़रूरी मीटिंग में जाना है.” रजिस्ट्रार उठ खड़े हुए थे.
कंचन की पूरी बात सुन कर आशीष ने समझाना चाहा था—
“देख कांची, रोहन जैसे गुंडे से पंगा लेना ठीक नहीं है. अपनी ऎसी ही हरकतों की वजह से वह बदनाम है. उसकी दादागिरी से सब डरते हैं. पढाई से उसे कोई मतलब नहीं है, अभी तक बी ए भी पास नहीं कर सका है. रजिस्ट्रार कह रहे हैं की वह रेशमा से माफी मांग लेगा तो बात खत्म कर दे.”
“तुम्हारा मतलब है उसके डर से किसी के साथ अन्याय होता देख कर भी चुप रहूँ ? सेक्रेटरी होने के नाते अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना मेरा कर्तव्य है, आशू.”
“मुझे जो कहना था कह दिया, आगे तेरी मर्जी, चल कुछ ठंडा पी कर आते हैं, तेरा दिमाग शांत हो जाएगा.”आशू फिर कंचन से हार मान गया.
दूसरे दिन पता लगा रजिस्ट्रार एक सप्ताह की छुट्टी पर चले गए है. कंचन ने यूनियन के प्रेसीडेंट गौतम से बात की और यूनियन की ओर से कड़ी कार्रवाई करने का प्रस्ताव रखा. गौतम बात आगे बढाने के पक्ष में नहीं था. उसका कहना था रोहन रेशमा से माफी मांग ले और बात खत्म की जाए, पर उत्तेजित कंचन इसके लिए तैयार नहीं थी.
“देखो, गौतम अगर हम ऎसी घटनाओं को सीरियसली नहीं लेंगे तो गुंडागर्दी और बढ़ जाएगी. आज उसने एक लड़की की चुन्नी खींच कर उसे सबके सामने अपमानित किया है, कल वह इसके भी आगे बढ़ सकता है.”
“शायद वह ऐसा कर भी चुका है, उसने एक लड़की को जबरन अपनी कार में ले जाने की कोशिश की थी. सौभाग्य से उस लड़की के चिल्लाने पर कुछ लोगों ने उसे बचा लिया.”
“इसके लिए क्या उसकी पुलिस में रिपोर्ट लिखवाई गई थी, गौतम?”कंचन विस्मित थी.
“नहीं, लड़की की बदनामी के डर से माँ-बाप चुप रह गए. वैसे भी रोहन के चाचा पुलिस के बड़े अधिकारी हैं, वह जानता है, उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा.”
“ठीक है. रोहन को यूनियन हॉळ में सबके सामने रेशमा से माफी मांगनी होगी और वादा करना होगा भविष्य में वह इस तरह की कोई हरकत नहीं करेगा.”
यूनियन हॉळ में भारी संख्या में विद्यार्थी जमा थे सब देखने को उत्सुक थे रोहन जैसा दबंग इंसान सबके सामने कैसे माफी मांगेगा. रेशमा तो आने को तैयार ही नहीं थी, पर कंचन के बहुत समझाने और हिम्मत दिलाने पर वह आई थी. नियत समय पर अपने साथियों के साथ पान चबाता हुआ रोहन दाखिल हुआ. एक नज़र चारों और डाळ, पान की पीक पिच्च से थूक कर बोला-
“अरे वाह ,यहाँ तो हमारे स्वागत की ज़ोरदार तैयारी की गई है. कहिए मैडम कंचन जी, हमारा डायळॉग कहाँ है? आखिर हम हीरो हैं, हमारा राइटर कौन है?”जोर से हंस कर रोहन बोला.
“बकवास बंद करो, सीधे-सीधे रेशमा से माफी मांगो और वादा करो आगे से कभी किसी के साथ ऐसा अभद्र व्यवहार नहीं करोगे.”कड़ी आवाज़ में कंचन ने चेतावनी दी.
“आपकी आज्ञा शिरोधार्य, पर ये तो फिल्मी ड्रामा है तो पूरी तरह से ड्रामा होना चाहिए. पहले हीरोइन को सामने लाइए. हम उसे छेड़ेंगे, वह रोएगी फिर हम माफी मागेंगे. अरे एक गड़बड़ हो गई आज लाल की जगह हीरोइन नीली चुन्नी ओढ़ कर आई है. पहले हीरोइन से कहिए वह लाल चुन्नी ओढ़ कर आए, तब हमारा ड्रामा शुरू होगा. क्यों दोस्तों, ठीक कहा ना?”
रोहन की इस बात पर कुछ विद्यार्थी हंस पड़े. कंचन की आखें क्रोध से लाल हो गईं. तैश में उठी कंचन ने रोहन के गाल पर एक ज़ोरदार थप्पड़ जड़ दिया. रोहन चौंक गया. विद्यार्थियों में सन्नाटा छा गया. गौतम के माथे पर पसीना छळछळा आया. रोहन ने जलती आँखों से कंचन को देख कहा
”ये थप्पड़ बहुत भारी पडेगा, याद रखना” फिर बिना माफी मांगे रोहन अपने दोस्तों के साथ चला गया.
“यह तुमने क्या किया कंचन, बड़ी मुश्किल से तो वह माफी माँगने को तैयार हुआ था. अब बात हाथ से निकल गई. तुम घर जाओ, मै बात सम्हालने की कोशिश करता हूं.”
“कैसे बात सम्हालेंगे, क्या उस रोहन से माफी माँगने का इरादा है?’तीखे स्वर में कंचन ने कहा.
“ये बात नहीं है, पर तुम नहीं जानतीं तुमने अपने लिए कितनी बड़ी मुश्किल खडी कर ली है. मुझे अब तुम्हारी चिंता है, कंचन.”गौतम ने गंभीर आवाज़ में कहा.
‘मेरी चिंता छोड़ो, अब रोहन से माफी कैसे मंगवाई जाए?”
“वो मै देख लूंगा. गलती हमारी ओर से भी हो गई, भले ही इसके लिए वह खुद ज़िम्मेदार था, पर इतने विद्यार्थियों के सामने अपना अपमान वह शायद ही भूल सके.”
घर वापिस पहुंची कंचन परेशान थी, शायद गौतम ठीक कह रहा है, उसे अपना मानसिक संतुलन नहीं खोना चाहिए था. रोहन से डीळ करने की ज़िम्मेदारी गौतम पर ही छोड़ देनी चाहिए थी. आशू अभी अपने काम से वापिस नहीं आया था. कंचन आशू का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी. उससे बात करके ही उसका मन हल्का हो सकता था.` आशू के आते ही कंचन एक सांस में पूरी घटना बता गई. पूरी बात सुनते आशू का चेहरा गंभीर हो गया.
“ये तुम क्या कर बैठीं, कांची? मै ने पहले भी समझाया था, रोहन एक बदनाम लड़का है, अपने पिता और पुलिस आफिसर चाचा के बल पर उसे कभी सज़ा नही दी जा सकी, इसी का फ़ायदा उठाता है.”
“मानती हूँ मुझे उस पर हाथ नहीं उठाना चाहिए था, पर उसकी बातें सहन करना कठिन था, आशू.”
“अब तुम्हें बहुत सावधान रहना होगा, कांची. रोहन अपने अपमान का बदला ज़रूर लेगा.”
“वह मेरा क्या बिगाड़ सकता है, अगर उसने कभी कोई गलत हरकत की तो उसका परिणाम उसे भुगतना होगा. तुम जानते हो मै कायर लड़की नही हूँ. याद नहीं, मै ने जूडो-कराटे की ट्रेनिंग ली है.”
“सब याद है, मेरी झांसी की रानी, पर अगर कोई गुंडा सीमा से आगे बढ़ कर कुछ करे तो तुम्हारे जूडो-कराटे धरे रह जाएंगे. मेरी बात समझ रही हो न? तुम्हारे आत्म विश्वास का मै प्रशंसक हूँ, पर अपने पर संयम रखना चाहिए. जोश में होश खो देना समझदारी नहीं है, कांची.”
“तुम मुझे डरा रहे हो आशू?”
“नहीं मेरी कांची, तुम्हे सावधान कर रहा हूँ. कल से मै तुम्हे अपने स्कूटर से पहुंचाया और लाया करूंगा.”गंभीर आवाज़ में आशू ने कहा.
“इस तरह से तो वो रोहन समझ जाएगा कि हम उससे डर गए हैं. वैसे भी दो महीने बाद तो तुम अमरीका जाने वाले हो. पता नहीं तुम्हारे बिना हम कैसे रहेंगे, आशू.”कांची उदास होगई.
“सच तो यह है, कांची पिछले कुछ दिनों से तुझे छोड़ कर जाने की बात सोच-सोच कर रातों में ठीक से सो नही पाता. हर समय तू मेरे ख्यालों में रहती है, चाह कर भी किसी और काम में दिल नही लगा पाता. ऐसा क्यों हो रहा है, कहीं ऐसा तो नहीं, मुझे तुझसे प्यार तो हो गया है?”आशीष ने गंभीरता से कहा.
“इस बारे में तो कभी सोचा ही नही, आशू, पर तेरे बिना हमें भी कुछ अच्छा नहीं लगता. तुम्हारे साथ अपनी सब चिताएं भूल जाती हूँ. कुछ भी होने पर बस तुम याद आते हो.”
“मुझे लगता है हम दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगे हैं तभी तो एक दिन भी मिले बिना हमें चैन नहीं पड़ता. जब हम दोनों साथ होते हैं तो सब कुछ कितना अच्छा लगता है, कांची.”
“शायद तुम ठीक कहते हो, हमें ज़रूर प्यार हो गया है. हर खुशी और परेशानी में बस तू ही याद आता है, अब हम क्या करें, आशू?”कंचन ने भोलेपन से पूछा.
“वैसे तो प्यार का अंत शादी में होता है, पर जब तक मै सेटल नहीं हो जाता, शादी तो हम कर नही सकते. ये तो हम जानते हैं हमारे परिवार वालों को हमारा रिश्ता स्वीकार होगा इस लिए शादी में कोई अड़चन तो नही आने वाली है., ऐसा करते हैं, दूर रहते हुए हम एक-दूसरे को प्रेम-पत्र लिखा करेंगे. तुम कविताओं में प्रेम-पत्र भेजना और मै वैज्ञानिक शब्दावली में उत्तर दिया करूंगा.” दोनों खुल कर हंस पड़े.
आज पहली बार जब आशीष ने कंचन को अपनी बांहों में लिया तो संकोच से कंचन ने अपना चेहरा आशीष के सीने में छिपा लिया. उस पल से दोनों की दुनिया ही बदल गई. रात में नींद कोसों दूर भाग गई. कंचन विस्मित थी इतने दिनों तक प्यार उन दोनों के बीच कैसे रहस्य बना रहा. एक-एक बात याद करते हुए रात बीत गई. यही हाल आशीष का था. दोनों को रात काटनी मुश्किल लग रही थी, कैसे सुबह हो और दोनों मिल सकें. प्यार में पागलपन इसे ही तो कहते हैं.
दूसरी सुबह पिछले दिन का तनाव भूल, कंचन काफी देर तक शीशे में अपने को देखती रही. वह सुन्दर थी, यह बात सब जानते हैं, पर अब आशीष के सामने वह कुछ ज़्यादा ही सुन्दर दिखना चाहती थी. कुछ ही देर में आशीष का स्कूटर उसे लेने आ पहुंचा था. स्कूटर में आशीष के पीछे बैठी कंचन रोमांचित थी. इसके पहले इस रोमांच का उसने कभी अनुभव नहीं किया था. झटका लगने पर आशीष की पीठ से सटी बैठी कंचन और ज़्यादा रोमांचित हो जाती थी. उसे लग रहा था, मानो वह हवा में उड़ी जा रही थी. लड़कों के रिमार्क्स उसे सुनाई ही नही दे रहे थे. वापसी में कंचन को लेने आने का वादा करके जाते हुए आशीष को जब तक वह आँख से ओझल नहीं हो गया कंचन उसे देखती रही. कुछ समय को वह रोहन को भूल गई थी, पर गौतम ने आकर जैसे उसे मीठे सपने से जगा दिया.
“कंचन, अब परेशान होने की ज़रुरत नहीं है. कल शाम मै रोहन से मिला और उसे प्यार से समझाया. अपने अपमान के बाद उसने सबके सामने तो माफी माँगने से इनकार कर दिया, पर यह माफीनामा दिया है.”गौतम ने कंचन को रोहन का लिखा माफीनामा थमा दिया.
‘गौतम’ क्या तुम्हे लगता है, अब रोहन लड़कियों के साथ मिसबिहेव नही करेगा?”
“हमें उस पर विश्वास करने की कोशिश तो करनी ही चाहिए. अब बात को ज़्यादा तूल देना मुझे ठीक नहीं लगता है. वैसे भी तुमने तो उसे सज़ा दे ही दी है.”गौतम हलके से मुस्कराया.
दिन बीतने लगे. कंचन और आशीष को लगता समय पंख लगा कर उड़ रहा है. आशीष के अमरीका जाने के दिन पास आते जा रहे थे. उसके विरह की कल्पना कंचन को बेचैन कर जाती. दोनों के प्यार को परिवार वालों की मूक सम्मति तो थी ही बस कुछ समय प्रतीक्षा करनी थी. अब कंचन भी अपना एम ए पूरा करने के लिए सीरियस थी. उसने सोच लिया था अब अपनी सेक्रेटरीशिप से त्यागपत्र देकर मन लगा कर पढाई करेगी फर्स्ट डिवीज़न लाने पर ही तो अमरीका जाना संभव होगा.
एक शाम यूनियन की मीटिंग में किसी विषय पर सदस्यों के बीच ज़ोरदार बहस चल रही थी, बाहर तेज़ बारिश हो रही थी, चाय और पकौड़े खाते वक्त का अंदाज़ ही नही हुआ कि अन्धेरा घिर आया था. आशीष दो दिनों के लिए अपनी नानी से मिलने कानपुर गया हुआ था.  आज कंचन को लेने आशीष नहीं आने वाला था, इसलिए वह निश्चिन्त थी. उस बरसात में भीगते हुए जाने की जगह कंचन ने यूनियन हॉळ में ही रुक कर बारिश हलकी होने का इंतज़ार करना ठीक समझा. उसके साथ कुछ और सदस्य भी रुके थे. जिनके पास वाहन था वे चले गए थे. कुछ देर बाद जब बारिश हलकी हुई तो कंचन ने अपनी साइकिल निकाली. आशीष की याद में डूबी कंचन को हळ्की फुहार में भीगना अच्छा लग रहा था. अचानक एक मोड़ से मुड़ती कंचन की साइकिल के पहिए में किसी ने डंडा फंसा दिया. कंचन साइकिल समेत ज़मीन पर गिर गई. उसके उठने के उपक्रम की जगह कुछ सबल हाथों ने उसे उठा कर पास खडी वैन में डाल दिया. कंचन के मुंह पर कस कर पट्टी बाँध दी गई. काफी दूर जाकर वैन एक खंडहर के पास रुकी थी. कंचन को जबरन उतार कर ज़मीन पर लिटा दिया गया. कंचन का हाथ-पाँव मारना बेकार था. उन वहशियों के सामने वह अवश थी. तीनो युवकों ने खूब शराब पी रखी थी.
“अरे यार, ज़रा कंचन जी का मुंह तो खोल दे, इनकी गालियों के साथ जोर-जबरदस्ती करने में ही तो मज़ा आएगा.”रोहन बेशर्मी से हंसा था.
“मुझे छोड़ दो रोहन, वरना बहुत बुरा अंजाम होगा.”कंचन ने तेज़ आवाज़ में कहा.
“ये बात तो थप्पड़ मारने के पहले सोचनी चाहिए थी, अब पता लगेगा रोहन से पंगा लेने का क्या अंजाम होता है, सारी अकड़ धरी रह जाएगी.”
कंचन की जूडो-कराते की ट्रेनिंग उन तीन दरिंदों के सामने काम नही आई. अपनी हवस पूरी कर तीनो कंचन को उसी खंडहर में छोड़ कर वैन ले कर चले गए. कुछ देर तक कंचन अर्ध मूर्छित सी पड़ी रही, फिर अपने को सहेज हिम्मत करके उठी थी. फटे कपड़ों को चुन्नी से ढांप, कराहती कंचन ने अंदाज़ लगाया वह शहर से कुछ दूरी पर थी. अचानक उसकी निगाह थोड़ी दूर पड़े अपने पर्स पर पड़ी थी. शायद उसे वैन से उतारते हुए पर्स भी नीचे गिर गया था. पर्स में उसका मोबाइल सुरक्षित था. पुलिस का इमरजेंसी नंबर लगा कर कंचन ने अपनी जगह का अनुमान से पता बताया था. काफी देर प्रतीक्षा के बाद पुलिस की गाड़ी का सायरन सुन कंचन अपनी जगह पर खडी हो गई. चुन्नी हवा में लहरा कर अपनी उपस्थिति भी बताने की कोशिश की. पुलिस की गाड़ी कंचन के पास आकर रुकी थी
“आप ठीक तो हैं, कहिए क्या हुआ, आप यहाँ. कैसे पहुंची.”इन्स्पेक्टर ने सवालों की झड़ी लगा दी.
“मुझे पहले थाने ले चलिए, मुझे एफ़ आई आर लिखानी है.”मुश्किल से कंचन इतना ही कह सकी.
थाने पहुंची कंचन ने गौतम को फोन कर तुरंत थाने आने को कहा, साथ में अपनी परिचित डाक्टर कविता को भी लाने को कहा. इन्स्पेक्टर कुमार अब तक सारी बात समझ गया था. कंचन ने सधी आवाज़ में अपने साथ घटी घटना की रिपोर्ट में जैसे ही रोहन नाथ का नाम लिया इन्स्पेक्टर रुक गया.
“देखिए मैडम, सोच समझ कर रिपोर्ट लिखाइए, इससे आपकी बदनामी हो जाएगी. परिवार वालों की इज्ज़त मिट्टी में मिल जाएगी.”
“अगर आपको मेरे परिवार और मेरी इज्ज़त का इतना ही ख्याल है तो पूरी रिपोर्ट ठीक-ठीक दर्ज कीजिए., मै यूनीवर्सिटी- यूनियन की सेक्रेटरी हूँ, एक बात और अभी वे गुंडे अपनी दरिंदगी का जश्न मना रहे होंगे, उन्हें अभी आसानी से पकड़ा जा सकता है..”कंचन ने तेज़ी से कहा.
विवश इन्स्पेक्टर को रिपोर्ट लिखनी पड़ी थी. रिपोर्ट पर साइन करने के पहले कंचन ने पूरी रिपोर्ट पढ़ कर साइन कर दिए. इस बीच घबराया गौतम कुछ लड़कों और डॉक्टर के साथ आ पहुंचा. कचन की हालत देख पूरी बात समझते देर नही लगी थी. डॉक्टर कविता ने अपना कोट उतार कंचन को पहना दिया. प्यार से सर पर हाथ फिराती डॉक्टर के सीने से चिपट कंचन फफक पड़ी. बड़ी देर तक साहस का जो बाँध बांधे हुए थी, वह टूट कर बह गया.
“घबराओ नहीं कंचन, हम अपराधियों को सज़ा ज़रूर दिलवाएंगे.”गौतम ने विश्वास से कहा.
“सबसे पहले कंचन का मेडिकल चेक-अप कराना ज़रूरी है. इस घटना से जुड़ा कहीं कोई तथ्य छूटना नही चाहिए. मेरे साथ एम्बुलेंस आई है. आओ कंचन.”प्यार से कंचन को कंधे से पकड़, डॉक्टर ने कंचन को उठाया था.
डगमगाते कदमों से कंचन सबके साथ एम्बुलेंस तक पहुंची थी. अस्पताल में डॉक्टर कविता के कारण कंचन को तुरंत एडमिट कर लिया गया. इस बीच गौतम ने कंचन के घर खबर कर दी थी. बदहवास माता-पिता बेटी को ऎसी हालत में देख संयम खो बैठे. कंचन की मां का रो-रो कर बुरा हाल था. जब उन्हें पता लगा कंचन ने इस घटना की रिपोर्ट पुलिस में लिखाई है तो रोना भूल मां सहम गई.
“ये क्या अनर्थ कर बैठी, कंचन? हम तो किसी को मुंह दिखाने के भी लायक नहीं रहेंगे.”
“ऐसा क्यों कह रही हो मॉं, मेरी कोई गलती नही है. पापियों को सज़ा दिलवानी ही चाहिए.कंचन ने क्षीण स्वर में मॉं को समझाना चाहा.”
“तू इस दुनिया को नही जानती, बेटी. गलती कोई भी करे दोष लड़की को ही दिया जाता है. अब तेरा क्या होगा. हम तो लुट गए..”मां ने आँखों से आँचल लगा लिया.
“आप ये कैसी बात कर रही हैं? आपको तो अपनी बेटी पर गर्व होना चाहिए. आज के समय में ये ज़रूरी है कि इस  तरह की घटना को छिपाया न जाए बल्कि उन भेड़ियों का पर्दाफाश करके उन्हें कड़ी से कड़ी सज़ा दिलवाई जाए. अगर उन्हें छोड़ दिया गया तो वे फिर किसी ऐसे ही शिकार के लिए आज़ाद होंगे.”डॉक्टर कविता ने कंचन की मां को समझाना चाहा.
“ये सब कहने भर की बातें हैं, कौन मेरी बेटी का साथ देगा, कौन इससे शादी करेगा. इस पर तो दाग लग गया.”मां फिर फूट पडीं.
“ऎसी ही बातें तो लड़की का मनोबल तोड़ देती हैं. आज ज़माना बदल गया है, मांजी. आप कंचन को हिम्मत देने की जगह उसे डरा रही हैं. आप दामिनी को भूल गईं, पूरे देश ने उसका साथ दिया था.”
“आप ठीक कहती हैं डॉक्टर हम और हमारे सब साथी कंचन के साथ हैं. हम उन दरिंदों को सज़ा दिलवा कर रहेंगे. कंचन जी के साहस से दूसरी लड़कियों को प्रेरणा मिलेगी.”गौतम ने जोश से कहा.
“गौतम, कल मुझे डिस्चार्ज कर दिया जाएगा. तुम जल्द ही यूनियन हॉळ में जेनरल बौडी मीटिंग बुला लो. मुझे अपने साथियों से बात करना ज़रूरी है.“
“ये क्या कह रही हो, ऎसी हालत में - - -“गौतम अपनी बात पूरी नहीं कर सका.
“तुम परेशान मत हो, मै बिलकुल ठीक हूँ. मुझे मुंह छिपाने या डरने की कोई ज़रुरत नहीं है. छिपने  की ज़रुरत उन दरिंदों को है.” उत्तेजना से कंचन का गोरा चेहरा लाल हो आया.
पागल हो गई है, पहले ही क्या कम बदनामी हुई जो अब अपनी बर्बादी की कहानी सरे आम सुना कर हमारे खानदान के मुंह पर कालिख पोतेगी,”माँ ने तीक्ष्ण स्वर में चेतावनी दे डाली.
“गलत कह रही हो, माँ, कालिख उनके मुंह पर लगेगी जिन्होंने पाप किया है. तुम परेशान मत हो.”
“तूने जब ठान ही ली तो कौन रोक सकता है. बाद में पछताने से कुछ नहीं होगा.”
“माँ जी आप परेशान ना हों, पूरी यूनीवर्सिटी के स्टूडेंट्स कंचन जी का साथ देंगे.”गौतम ने कहा.
चार दिन बाद यूनियन हॉल स्टूडेंट्स से खचाखच भरा हुआ था. जिन्हें घटना का कुछ आभास हो गया था वे धीमी आवाज़ में बातें कर रहे थे. कंचन के आते ही सन्नाटा छा गया. कंचन के चेहरे पर थकान होते हुए भी आँखें जैसे जल रही थीं. संयत आवाज़ में कंचन ने कहना शुरू किया=
“साथियो, अपने परिवार के कड़े विरोध के बावजूद आपके साथ अपनी आप बीती शेयर करने आई हूँ. मुझे पूरा विश्वास है आपका जो सहयोग मुझे मिलता रहा है आज भी मिलेगा. आप जानते हैं मै ने नि:स्वार्थ भाव से हमेशा न्याय और सच्चाई का साथ दिया है. अपने भाइयों से पूछना चाहती हूँ क्या आप अपनी बहिन का सम्मान लुटते हुए देख या सह सकते हैं? मै जानती हूँ आपका उत्तर नहीं होगा तो जान लीजिए आपकी इस बहिन कंचन का रोहन और उसके साथियों ने रेप किया है. मै ने एक लड़की के सम्मान की रक्षा में उनका विरोध किया था उसके बदले उन्होंने  यह घृणित काम किया है. अगर शहर में रोहन जैसे भेड़िए खुले घूमते रहे तो वे अपने शिकार करते रहेंगे. मेरी माँ को और दूसरी माओं की तरह भय है कि अगर मेरे रेप की बात फैली तो परिवार और मेरी बदनामी होगी. क्या समाज के भय से हम इन पापी दरिंदों को और पाप करने की छूट दे सकते हैं. अगर मेरा रेप हुआ है तो क्या इसमें मेरी कोई गलती थी, नहीं, फिर मै क्यों उन दरिंदों का पाप छिपाऊँ? क्या रोहन और उसके साथी आज मेरी तरह सर उठा कर यहाँ खड़े हो सकते हैं? अब आपको न्याय करना है, सज़ा और समाज की घृणा किसे मिलनी चाहिए?”
 “रोहन और उसके साथियों को फांसी दो. कंचन को न्याय दो” समवेत आवाजें गूँज उठीं.
दूसरे दिन अखबारों की सुर्ख़ियों में घटना छपी थी. यूनीवर्सिटी के छात्र-छात्राओं ने जुलूस निकाल कर थाने और रजिस्ट्रार के ऑफ़िस पर धरना दे दिया. रोहन और उसके साथियों को सज़ा दिलवाने के लिए पूरे शहर में शोर मच गया था. लडकियां और भी अधिक जोश में थीं. अब वे और अत्याचार सहने को तैयार नहीं थीं. घर पहुंची कंचन के पास लडकियां फूल लेकर पहुँच रही थीं, अब शहर की महिला संस्थाएं भी आन्दोलन में सम्मिलित हो गई थीं, पर जिसकी प्रतीक्षा कंचन को सबसे अधिक थी, आशू उसके पास नही आया था. अंतत: आशू भी सामान्य पुरुष ही निकला, उसके माता-पिता कुछ देर को आ कर उसे तसल्ली दे कर चले गए थे.
आखिर रोहन और उसके साथी पकडे गए. आन्दोलनकारियों ने उसे फांसी देने के लिए शोर मचाया. अचानक एक दिन रजिस्ट्रार कंचन के घर आ पहुंचे. भांसू भरी आँखों के साथ कंचन के सामने हाथ जोड़ कर रोहंन की गलती के लिए क्षमा मांगी थी.
“अपने बेटे की गलती के लिए बहुत शर्मिंदा हूँ, बेटी. तुम उसे जो सज़ा दोगी, मंज़ूर है, पर उसे माफ़ कर दो. अपनी रिपोर्ट वापिस ले लो. मै ज़िंदगी भर के लिए तुम्हारा कर्ज़दार रहूँगा ”
“अगर यही घटना आपकी बेटी के साथ होती तो क्या आप ऐसे पापी को माफ़ कर देते? रोहन के इस अपराध में आप भी शामिल हैं, रजिस्ट्रार महोदय. आपने अगर मेरी शिकायत पर कोई कडा ऐक्शन लिया होता तो आज रोहन इस हद तक नहीं बढ़ सकता था.”कडवे स्वर में कंचन ने अपना फैसला सुना दिया.’
“अपनी गलती मानता हूँ,बेटी, मेरी आँखों पर बेटे के प्यार का पर्दा पडा हुआ था. उसके अपराध के लिए मै तुमसे माफी माँगता हूँ. बस एक मौक़ा दे दो, कभी शिकायत का अवसर नही दूंगा.”
“आप मेरे पिता की उम्र के हैं , मुझसे माफी मांग कर शर्मिन्दा न करें. रोहन को उसके किए की सज़ा मिलनी ही चाहिए, शायद सज़ा पाने के बाद वह सुधर जाए. मुझसे माफी की आशा रखना व्यर्थ है.”
रोहन और उसके साथियों को जब अदालत ले जाया जा रहा था तो उत्तेजित भीड़ ने उस पर जूते और पत्थर फेक कर अपना आक्रोश प्रकट किया था. टीवी पर बराबर खबरे दी जा रही थीं, सारा शहर जैसे जाग गया था, गौतम और कुछ लड़के-लडकियां कंचन को दिन-प्रतिदिन के समाचार देने आते थे. उन्होंने लिखित रूप में अपनी मांगें अथॉरिटीज़ को सौंप दी थीं, उन दरिंदों को ज़मानत न दी जाए और जल्दी से जल्दी कड़ी सज़ा दी जाए, ये शर्तें पूरी होने पर ही आन्दोलन रुकेगा. उनकी शर्तें मान ली गईं  थीं. अन्याय पर यह उनकी पहली विजय थी, पर अभी दरिंदों की सज़ा के लिए प्रतीक्षा करनी थी
पर आशू कहाँ था? सात दिन बीत चुके थे आशू का कहीं पता नही था. अपने कमरे में चुप बैठी कंचन जैसे दूसरी ही कंचन थी. उसकी तेजस्विता कहीं खो गई थी. टीवी पर आते समाचारों में उसकी रूचि ही नही रह गई थी. खिडकी से बाहर नज़र गडाए कंचन को किसी की प्रतीक्षा थी. इसी खिडकी पर खड़े हो कर वह और आशू दुनिया भर की बातें किया करते थे. आज इस समय जब उसे आशू की सबसे ज़्यादा ज़रुरत थी वह कहीं नहीं था. दोनों ने जब अपने प्यार को पहचाना, भविष्य के मीठे सपने देखने शुरू किए तो एक झटके में सपने टूट कर बिखर गए. कहाँ है उसका आशू?
.“हेलो, मेरी झांसी की रानी, आराम फरमाया जा रहा है.”अपनी परिचित मोहक मुस्कान के साथ आशू कमरे में खडा था.
“आशू - - कहाँ थे?”कई दिनों के रुके आंसुओं का सैलाब बह निकला.
“ये क्या, मेरी शक्ल इतनी डरावनी तो नही कि मेरी कांची डर से रो पड़े.”आशू हंस रहा था.
‘तेरा कहना नहीं माना, आशू, माफ़ कर दे, हम से नफ़रत तो नही करेगा? तेरी नफरत हम सह नही सकेंगे.”कंचन की आवाज़ रुंध गई.
“अपने आशू को बस इतना ही जान पाई, कांची. ये सच है, इस खबर से स्तब्ध रह गया, बहुत चोट भी पहुंची, तेरे दर्द की कळ्पना से सो नही सका. बस तेरे बारे मे ही सोचता रहा.”
“फिर आया क्यों नही, आशू हर पल तेरी राह तकती रही, जानती हूं हमारे सपने टूट गए. तेरे अमरीका जाने का समय आ रहा है, अच्छा है तू वहां जाकर इस हादसे को और हमे भुला सकेगा.” भीगी आवाज़ मे कंचन ने कहा”
“वाह, समस्या का कितना सहज उपाय निकाला है. अमरीका जाकर तुझे भूल जाऊंगा. तू मुझे भुला सकेगी, स्वार्थी तो नहीं कहेगी?”
“नहीं आशू, हम जानते हैं इस हादसे के बाद मेरी ज़िन्दगी की दिशा बदल जाएगी., पर मै डर कर या शर्म से मुंह नहीं छिपाऊंगी. मै ने कोई अपराध नहीं किया, अपनी ज़िन्दगी सर उठा कर जीऊँगी.”दृढ़ता से कंचन ने कहा.
“ये हुई ना बात. अब मुझे यकीन हो गया, मै ने जिस कांची से प्यार किया, वह कायर नहीं है. कायर तो मै था जो तेरा सामना करने से कतराता रहा. बहुत सोचा और समझ गया, अगर तुझसे सच्चा प्यार किया है तो उस घटना को क्यों तूल दे रहा हूँ, जिसमें तेरा कोई दोष ही नहीं है बस बात समझ में आ गई और तेरा आशू तेरे सामने है. देर से आने के लिए माफ़ करेगी न?”.
“क्या तुम सच कह रहे हो, तुम पर इस घटना का कोई असर नही हुआ?”
“तेरी तकलीफ और अपमान पर बहुत आक्रोश था, अपने से बेहद नाराज़ था, फिर सोचा तूने उस स्थिति में भी अपना साहस नहीं खोया थाने में जाकर उन दरिंदों के खिलाफ स्वयं रिपोर्ट लिखवाई, साहस के साथ सारी सच्चाई सबके सामने रखी. उस के लिए तुझ पर गर्व हुआ और अपनी सोच पर शर्म आई. तेरे सामने अपने को बहुत छोटा महसूस करता हूँ, कांची, मुझे माफ़ कर सकेगी.’
“तू मेरी शक्ति है, आशू, माफी मांग कर मुझे शर्मिन्दा मत कर. तेरे साथ आपनी लड़ाई और जोश से लड़ सकूंगी”कंचन के चहरे पर खुशी की आभा बिखर गई.
“तुझ पर पूरा यकीन है, कांची. याद रख तेरी हर लड़ाई, हर विजय में तेरा आशू हमेशा तेरे साथ है.”
“तेरा  यकीन कभी टूटने नहीं दूंगी, आशू. ये मेरा वादा है.”
“तो चलो बाहर तुम्हारे साथी तुम्हारा अभिनन्दन करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं.” प्यार से कंचन का हाथ पकड आशू ने अपनी कांची को उठाया था. बाहर से आता हर्षोल्लास नए युग का सन्देश दे रहा था.



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