प्यार के रंग

                         
आंसुओं से धुंधलाई आँखों से देखती गीता के सामने अतीत के चित्र उभरते आ रहे थे. भारत से एम बी बी एस करने के बाद गीता ने अमरीका से एम डी करने जाने की जिद ठान ली. हमेशा से अच्छे रिज़ल्ट के कारण गीता को अमरीका के नामी मेडिकल काळेज से एडमीशन कॉळ आ गई. माँ का दिल अपनी सुन्दर और बिन ब्याही बेटी को अकेले अमरीका भेजते डर रहा था. पति ने इस संसार से विदा लेते हुए पत्नी से कहा था-
“अपनी प्यारी बेटी को तुम्हारे सहारे छोड़ कर जा रहा हूँ, शान्ति. इसकी हर इच्छा पूरी करना. अब तुम ही इसके पिता की जगह हो.”
गीता ने ढेरों उदाहरण देकर माँ को समझाया था-
“आजकल लड़कियों के लिए हिन्दुस्तान से ज़्यादा अमरीका सुरक्षित है, सुनती नहीं यहाँ रोज़-रोज़ रेप के केस हो रहे हैं. मेरी कई सीनियर अमरीका गई हैं और वे वहां बहुत खुश हैं. अब ज़माना बदल गया है,.तुम बेकार डरती हो माँ. अगर आज पापा होते तो क्या वह मुझे जाने से रोकते?
“अगर तेरे पापा होते तो वह भी यही कहते कि तू शादी के बाद ही अमरीका जाएगी. आखिर देव और कितने सालों तक तेरा इंतज़ार करता रहेगा? पहले जिद थी एम बी बी एस पूरा कर लूं और अब अमरीका जाने की ठान ली है.”माँ के स्वर में नाराजगी स्पष्ट थी.
“माँ, देव से कहो, मेरा इंतज़ार न करे. अब तो देव कम्प्यूटर एक्सपर्ट बन गया है. किसी भी और अच्छी लड़की से शादी कर सकता है, मुझे अपना भविष्य बनाना है.”
“उसने तेरे पापा को वचन जो दिया है. तू भले ही न माने, पर देव वचन का मोल जानता है. इतना ही नहीं वह तुझे सच्चे मन से चाहता है और सच कह क्या तू भी उसे नहीं चाहती?’
.”तुम जो कह रही हो वो सच है, मुझे देव बहुत अच्छा लगता है, पर देव ने मुझसे कभी क्यों नहीं कहा कि वह मुझे चाहता है.”
“देव गंभीर स्वभाव का लड़का है, वह तेरे लिए कितना कंसर्न है, क्या तू नहीं जानती? मेरा अनुभव कहता है, उससे ज़्यादा तुझे प्यार करने वाला दूसरा नहीं मिलेगा सच कह क्या उसके साथ शादी के लिए तुझे देव पसंद नही?’”माँ ने सीधा सवाल किया.
 “ऎसी बात नहीं है, माँ. मानती हूँ, देव बहुत अच्छा इंसान है. उससे किसी को भी प्यार हो सकता है. वह मेरा बहुत ख्याल रखता है, मेरी हर बात पूरी करने में उसे खुशी मिलती है. अगर वह मुझे इतना प्यार करता है तो मेरे अमरीका जाने के फैसले में भी उसे खुशी ही मिलेगी.”
“इस बात से तेरा  क्या मतलब है.”माँ शंकित दिखी.
“यही कि अगर देव मुझे सच्चा प्यार करता है तो वह मुझे अमरीका जाने की परमीशन ज़रूर देगा मुझे पहले देव से बात करनी होगी, अगर वह मुझ अमरीका जाने देगा तो ज़रूर तेरी बात मान कर उसके साथ शादी का वचन देती हूँ .”
“अगर ऐसा ही है तो आज ही देव से बात करती हूँ. तेरे पापा के जाने के बाद उसने हमें सम्हाला है. देव के पास धन-संपत्ति की क्या कमी थी, उसके पैसे लूटने के लिए हज़ारों लोग सहायता के लिए आगे आए थे, पर देव ने बस तेरे पापा पर ही विश्वास किया था. उस समय वह कम्प्यूटर साइंस में फाइनल इयर में ही तो था. आज अपनी बुद्धि से इतने ऊंचे पद पर पहुंचा है.”
गीता के इस उत्तर ने माँ के मन में आशा जगा दी. फोन से देव को तुरंत आने के लिए कह कर माँ, उसके स्वागत की तैयारियों में जुट गई.
गीता को याद आया करीब पांच वर्ष पहले स्टेट-मेडिकल एंट्रेंस एक्जाम में सफल होकर वह खुशी से उमगती घर में घुसी थी. पापा के साथ एक सौम्य गंभीर युवक को देख वह ठिठक गई थी. पापा ने स्नेह से परिचय दिया था-
“गीत, इसे पहचाना, कोशिश कर शायद याद आ जाए.”
गीता के चहरे पर अपरिचय का भाव देख पापा ने कहा था-
“मेरे मित्र रमेश की आखिरी निशानी उसका यह बेटा देव है. रमेश जब सपरिवार आगरा आया था. तब देव बस तेरह-चौदह साल का था, इसलिए तू इसे पहचान नहीं सकी वरना तूने ही इसे ताजमहल दिखाया था. उसके बाद रमेश दुबई चला गया और वहीं इस दुनिया से विदा ले गया. इसकी माँ तो इसे पहले ही छोड़ कर जा चुकी थी. मेरे लिए रमेश की यही आखिरी सौगात है.””पापा का गला भर आया.
“पापा को आप पर बहुत विश्वास था, आपको बहुत मिस करते थे. कभी अपने दुबई जाने के निर्णय पर पछताते थे. उन्हें लगता था पैसों के लोभ ने उन्हें आप जैसे स्नेही मित्र से दूर कर दिया.”देव के सौम्य चहरे पर दुःख की छाया स्पष्ट थी.
“हाँ फोन पर वह हमेशा ऎसी बातें किया करता था, पर मुझे क्या पता था, वह यूं चला जाएगा. देख बातों में मै तो अपनी बेटी से तेरा परिचय कराना भूल ही गया. देव, यह मेरी बेटी गीता, डॉक्टर बनने  का सपना देख रही है.”
“सिर्फ सपना ही नहीं देख रही हूँ, पापा मै ने स्टेट- एंट्रंस एक्जाम में बहुत अच्छी पोजीशन में क्वालीफाई किया है. अब किसी भी अच्छे मेडिकल कॉळेज में एडमीशन मिल जाएगा.”कुछ गर्व से गीता ने कहा,
“कांग्रेट्स. आप किस काळेज में जाना चाहती हैं?’ देव ने पूछा था.
“मेरी तो ऑळ इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकळ सांइंस यानी दिल्ली में एम्स से मेडिसिन करने की इच्छा है, अब उसके रिजल्ट का इंतज़ार है.”
“आई विश आपकी इच्छा पूरी हो. सच्चे मन से अगर कुछ चाहा जाए तो वो बात ज़रूर पूरी होती है.’
“थैंक्स, अगर यह सच हुआ तो आपकी ये बात ज़रूर याद रखूंगी.”
“अगर इसका सपना पूरा हुआ तो मुझे भी खुशी होगी, वैसे मेरी गीत पढाई में तेरी ही तरह हमेशा अव्वल रही है. दिल्ली आई आई टी से तूने भी एम एस किया है और दिल्ली में ही अच्छा जॉब ले लिया है. इस वजह से मुझे भी गीत की और से निश्चिंतता रहेगी.” पापा ने खुशी से कहा.
उसके बाद सब कुछ कितनी जल्दी घट गया. गीता का सपना सच हो गया. एम्स में एडमीशन की खुशी वह कहाँ मना पाई थी. अचानक पापा के हार्ट अटैक की सूचना पर वह देव के साथ आगरा पहुंची थी. हॉस्पिटळ में पापा को देख गीता रो पड़ी थी. पापा ने मुस्कराने का असफल प्रयास किया और अचानक पास खड़े देव का हाथ पकड़ गीता के हाथ में देकर धीमी आवाज़ में कहा था-
“वादा करो, मेरी गीत से विवाह करोगे, देव. तुम्हारी हाँ से मैं शान्ति से जा सकूंगा.”
देव के चेहरे पर असमंजस सा था, पर एक बार गीता को देख उसने गंभीर आवाज़ में कहा-
“मै वादा करता हूँ, पर हमें आशीर्वाद देने के लिए आप को रहना होगा, आप ऐसे नहीं जा सकते, पापा के बाद अब आपको नहीं खो सकता. “देव की बात सुनते ही पापा के चेहरे पर शान्ति की मुस्कान आ गई और उन्होंने सदा के लिए आँखें मूँद लीं.
उस दुःख की घड़ी में देव ने उसे और माँ को सम्हाला था. एक बेटे की तरह सब दायित्व पूर्ण किए थे. माँ के साथ उनकी विधवा चचेरी बहिन को रख कर, उदास गीता को सच्चाई का साहस से सामना करने के लिए समझा कर अपने साथ उसे दिल्ली वापस लाया था.
उसके बाद हर वीकेंड पर गीता से कॉळेज मिलने आने का उसने नियम बना लिया था. कभी जबरन उसे  किसी मूवी या पार्क में ले जाकर उसका दिल बहलाने की कोशिश करता. सच तो यह है, देव के सहारे ही गीता अपने दुःख के दिन काट सकी थी. उन मुलाकातों में देव उसका बेहद ख्याल रखता, पर कभी प्यार का इज़हार करने की कोशिश नही की. गीता को उसका साथ अच्छा लगता, वह गीता को अपना दुःख भुला, अपनी पढाई पर ध्यान देने के लिए भी प्रेरित करता. उन दोनों के बीच जैसे एक अव्यक्त दूरी होने पर भी बहुत निकट का साथ होता. गीता कभी सोच ही नही सकी कि उन दोनों के बीच किसी फिल्मी प्यार जैसी बात थीं. उसने कभी गीता से नहीं कहा कि वह उसे बेहद चाहता है, उसके बिना उसका जीवन अधूरा है. इसके बावजूद उसके साथ गीता अपने को पूर्ण महसूस करती. गीता अपने को समझाती, उसके लिए देव का हद से ज़्यादा कंसर्न प्यार के सिवा और क्या हो सकता है? गीता की हर बात पूरी करते उसके चेहरे पर जो खुशी और संतोष आता है, वह किसी बहुत अपने के प्रति प्यार के कारण ही तो आता है. वह देव पर किस हद तक निर्भर थी, दोनों के बीच एक अव्यक्त प्यार मुखर था.
 अपनी फाइनल परीक्षा में टॉप करके देव ने एक नामी कम्प्यूटर कम्पनी ज्वाइन की थी. अपने काम और मेधा के कारण वह कम्पनी के चीफ का फेवरिट ऑफिसर था. उसके उज्ज्वळ भविष्य के प्रति कोई संदेह नहीं था. माँ का कहना सच ही था, अपनी मेधा और मेहनत से आज उसकी गिनती कम्प्यूटर- विशेषज्ञों में हो रही थी.
माँ का फोंन  पाकर देव आगया था. बुद्धि प्रदीप्त आँखें और चेहरे की खुशी से स्पष्ट था जैसे वह किसी सुखद समाचार की आशा कर रहा था. माँ के पाँव  छू सहास्य पूछा था –
“कैसी हो माँ, सब ठीक तो है? अचानक बुलावे पर समझ नहीं सका क्या बात है?”
“अरे इस पागल लडकी को तू ही समझा सकता है, मेरी तो बात ही नहीं सुनती.”
“ओह माँ, पहले देव को शांति से बैठने तो दो, फिर मेरी शिकायतें करती रहना. मै चाय लाती हूँ.”
”देव बेटा, अब गीता अमरीका जाने की जिद किए बैठी है. कहती है अमरीका से एम डी करना उसका सपना है. तू ही बता क्या इंडिया से एम डी की डिग्री नहीं ले सकती? अकेली लड़की को अमरीका कैसे भेजूं?”गीता के जाते ही माँ ने अपने दिल की बात देव के सामने रख दी.
“अगर गीता का यही सपना है तो उसे जाने दीजिए. टूटे सपने ज़िन्दगी उदास कर देते हैं.”
“थैंक्स, देव. देखा माँ, देव भी यही मानते हैं, अब तो तुम मुझे जाने दोगी न?”गीता का चेहरा खुशी से जगमगा रहा था, उस खुशी में देव के चेहरे पर छाई उदासी वह कहाँ देख सकी थी.
“देव, अगर तुम भी ऐसा ही सोचते हो तो तुम्हारी इजाज़त से इसे अमरीका जाने दूंगी, पर मेरी भी एक शर्त है, सगाई के बाद ही गीता अमरीका जा सकती है. तुम्हे तो कोई ऐतराज़ नही है, देव बेटा.”
“आपकी आज्ञा मेरे लिए वरदान जैसी है, पर गीता की सहमति भी ज़रूरी है.”
“अमरीका जाने के लिए तो मुझे हर शर्त मंजूर है, माँ.”गीता प्यार से माँ के गले से लिपट गई.
“सिर्फ अमरीका जाने के लिए ही माँ की शर्त मंजूर है, गीता?” गीता की आँखों में सीधे देख देव ने गंभीरता से सवाल किया था.
“नहीं देव बेटा, भला तुम जैसे हीरा के लिए क्या कोई लड़की दो बार सोचेगी? तुम्हारे लिए इसके मन में क्या है ये बात भला मुझसे ज़्यादा अच्छी तरह कौन जानेगा, माँ हूँ इसकी.”
इसके बाद माँ ने देर नही की थी, पंडित और अपने कुछ निकट संबंधियों की उपस्थिति में एक सादे समारोह में देव के साथ गीता की सगाई संपन्न कर दी. आशीर्वाद देती माँ पति की याद करती रो पड़ी.
“आज गीता के पापा होते तो कितनी शान से सगाई करते.”
“माँ आपका आशीर्वाद ही हमारे लिए सब कुछ है. आज से गीता मेरी ज़िम्मेदारी है. आप मन छोटा न करें, आपका ये बेटा जो है.”
“खुश रहो, बेटा. भगवान तुम दोनों को हमेशा सुखी रखें.माँ ने आंसू पोंछ डाले.
एकांत में देव ने कहा –
बहुत दूर जा रही हो, गीत, पर तुम पर अटूट विश्वास और अभिमान है. तुम्हारी फ्लाइट के टिकट बुक करा दूंगा. ज़रूरी सामान की शौपिंग के लिए दिल्ली आ जाना मै साथ रहूँगा. वहां ये इन्डियन ड्रेसेस नहीं चलेंगी. डॉक्टर साहिबा को पेंट-कोट पहनना होगा.”कुछ मुस्कुरा कर देव ने कहा.
शुक्रिया, देव तुम बहुत अच्छे हो.”गीता ने सच्चे मन से कहा
 दिल्ली में ज़रूरी सामान की खरीददारी में समय पंख लगा कर उड़ गया. अपने काम से अवकाश ले कर देव गीता के छोटे-बड़े सामानों की खरीददारी में साथ देता रहा. एयरपॉर्ट पर उसे विदा देने माँ भी आई थी. रोती माँ को देव ने ही सहारा दिया था. सिक्योरिटी के लिए अन्दर जाती गीता देर तक देव और माँ को हाथ हिलाते देखती रही थी.
प्लेन में बैठी गीता का मन प्लेन की गति से भी अधिक तेज़ उड़ान भर रहा था. सौभाग्यवश उसे कॉळेज के हॉस्टेल में कमरा मिल गया था. कल्पना से भी अधिक बड़े से अमरीकी एयरपॉर्ट को देख गीता विस्मित थी. टैक्सी से हॉस्टेल जाती गीता चारों ओर की भव्य इमारतें और हरियाली देख विस्मय-विमुग्ध थी. मन में आया काश, देव भी उसके साथ होता. कॉळेज के पहले दिन की कल्पना ने उसे ठीक से सोने भी नहीं दिया. दूसरी सुबह जल्दी ही कॉळेज पहुँच गई थी.
मेडिकल कॉळेज की भव्य इमारत ने गीता को अभिभूत कर दिया. चारों ओर देखती गीता को पीछे से आई एक आवाज़ ने चौंका दिया-
“आई गेस, अ न्यू कमर फ्रॉम इंडिया, ठीक कह रहा हूँ न?”
“जी कल ही पहुंची हूँ, अभी अपना डिपार्टमेंट ढूंढना है” कुछ् संकोच से गीता ने कहा.
“किस फैकल्टी में एम डी ज्वाइन कर रही हैं?
“इन्टरनल मेडिसिन चुना है. शायद आप भी यहाँ स्पेशलाइज़ कर रहे हैं?’
“वाह, यह तो मेरी खुशकिस्मती है, मै भी इन्टरनल मेडिसिन में सीनियर रेसीडेंट हूँ. आपका सीनियर ज़रूर हूँ, पर ड्यूटी और राउंड के समय तो आपका साथ रहेगा.””कुछ मुस्कुरा कर उसने कहा.
“आप तो अमेरिकन लगते हैं, पर इतनी अच्छी हिन्दी कैसे बोल रहे हैं?”ताज्जुब से गीता ने पूछा.
“थैंक्स टु माई इन्डियन मॉम, आपकी जानकारी के लिए हिन्दुस्तानी माँ और अमेरिकन डैड का इकलौता बेटा हूँ. घर में मॉम हिन्दी में ही बात करती है, इतना ही नही मॉम ने तो मेरे डैड को भी आधा हिन्दुस्तानी बना लिया है. वैसे तो मेरे बाबा- परदादा करांची से दिल्ली आए थे, पर अब तो वे सब दिल्ली में ही सेटल हो गए. आप किस शहर से हैं?”
“जी आगरा से आई हूँ. वैसे मैने अपनी पढाई दिल्ली से की है.”
“तब तो हम एक शहर के कहे जा सकते हैं, पर आपके शहर आगरा में तो मोहब्बत की शान बढाने ताजमहल खड़ा है. मॉम के साथ आगरा जा चुका हूँ. लीजिए यह रहा हमारा डिपार्टमेंट. सामने ही ऑफिस है, वहां से पूरी जानकारी मिल जाएगी.”
“थैंक्स आपने मेरी बहुत हेल्प की और आपसे मिल कर बहुत अच्छा भी लगा. बाई दी वे आपका नाम तो पूछा ही नही. वैसे मै गीता हूँ.”
“मेरा नाम तो शायद आप कभी न भूल पाएं मैं रोनाल्ड हूँ, पर सब यंग लेडी कलीग्स मुझे रोमियो के नाम से पुकारती हैं. आप भी यही नाम याद रख सकती हैं. ठीक कह रहा हूं न?”फिर वही मनमोहक हंसी ओंठों पर थी.
“आपसे मिल कर ऐसा लगा जैसे कोई अपना पुराना परिचित मिल गया हो. मुझे अमरीका की कोई खास जानकारी नहीं है, पर आपसे मिल कर मेरा डर कम हो गया है.”
“बहुत जल्दी यहाँ की ज़िन्दगी रास आने लग जाएगी. मुझे खुशी है मेरी वजह से आपका डर कम हो गया. वैसे मुझसे दूर ही रहिएगा, मुझ में मैग्नेटिक पावर है.”
गीता रोनाल्ड के साथ अपने डिपार्टमेंट के ऑफिस में जब पहुंची वहां एक अमरीकी युवती ने मुस्करा कर गीता का स्वागत किया और गीता से उसका परिचय माँगा. सभी सर्टिफिकेट्स तो उसके पास पहले से ही मौजूद थे, रोनाल्ड को साथ आया देख युवती ने उससे अंग्रेज़ी में कहा-
“रोमियो, डियर, अपनी नई कलीग डॉक्टर गीता से मिलो. आज ही इंडिया के नामी कॉळेज से आई हैं. इनके सब साथियों से इन्हें मिला देना. होप यूं विल नॉट माइंड?”
“ओह नॉट ऐटॉळ, इट्स माई प्लेज़र. वेलकम डॉक्टर गीता”मुस्कुराते हुए रोनाल्ड ने गीता से हाथ मिलाने के लिए अपना हाथ बढाया था.
अपने को सहेज कुछ संकोच से गीता ने अपना हाथ उसके हाथ में दिया था. रोनाल्ड के हाथ के दवाब से गीता का चेहरा सिंदूरी हो आया. रोनाल्ड मुग्ध देखता रह गया.
डिपार्टमेंट के हेड ने सभी नए इंटर्न्स को उनकी ड्यूटीज़ के चार्ट दे कर समझाया था-
“इस हॉस्पिटळ का नाम पूरे देश में सम्मान से लिया जाता है, इसका श्रेय आप जैसे योग्य और मेहनती डॉक्टर्स को जाता है.मुझे विश्वास है आप इसे और ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे. सवेरे आपके क्लास होंगे, बीच के ब्रेक में किसी डॉक्टर और रेसीडेंट्स के साथ राउंड पर जाना होगा. उस समय मरीजों के बारे में जो डिस्कशन होगा, उसे ध्यान से सुनना चाहिए. आगे यही आपके काम आएगा.”
तालियों के साथ सबने अपनी खुशी जताई थी. गीता भी उत्साहित हो उठी. गीता के साथियों में कई इम्टर्न बाहर के देशों के भी थे, पर किसी भारतीय को न देख गीता को कुछ निराशा हुई थी. अचानक हेड की निगाह गीता के पास बैठे रोनाल्ड पर पड़ी थी.
“डॉक्टर रोनाल्ड आप यहाँ कैसे, आप तो इन्टर्न नहीं रेसीडेंट है? अपनी ड्यूटी छोड़ कर यहाँ. क्या फिर इन्टर्नशिप करनी है?”हेड ने परिहास किया.
“यस, डॉ स्माइल, आगे इन्हीं जूनियर्स के साथ काम करना है तो सोचा पहले ही इनसे परिचय हो जाना अच्छा होगा. कुछ नए इंटर्न्स का डर भी दूर करना चाहिए.”उसने गीता को तिरछी नज़र से देखा.
“डॉक्टर रोनाल्ड, आपके कंसर्न के लिए थैंक्स, मुझे ठीक बताया गया है आपका सही नाम रोमियो क्यों रखा गया है. यूं बेटर गो और अपनी ड्यूटी करो.”
“जी अभी जाता हूँ.” हेड के जाते ही रोनाल्ड ने गीता का सबसे परिचय करा कर बताया था-
“मीट डॉ. गीता, इनमे ब्रेन और ब्यूटी दोनों देखी जा सकती हैं. इनसे सबसे पहले मिलने वाला लकी इंसान मै हूँ इसलिए इनसे दोस्ती का सबसे पहला हक़ मेरा है. ऐनी ऑब्जेक्शन? ओ के, तो डॉ गीता आप मेरी पहली और आखिरी दोस्त हुईं .”
“आखिरी क्यों, क्या मेरे अलावा आप किसी और के दोस्त नहीं है?”’गीता ने आश्चर्य से पूछा.
“अब आप जैसी गर्ल फ्रेंड के होते हुए किसी और की दोस्ती की चाहत ही नहीं रह गई.”
“इतनी जल्दी आपने मुझे अपनी गर्ल फ्रेंड कैसे मान लिया, अभी तो आपको ठीक से जानती भी नहीं.”
“डोंट वरी, बहुत जल्दी जान जाओगी. एक बात इस डिपार्टमेंट में दो सीनियर डॉक्टर इन्डियन हैं, आपको उनसे मिल कर खुशी होगी, वैसे हमारा साथ भी कुछ बुरा नही रहेगा.”रोनाल्ड के चेहरे पर शरारती मुस्कान थी.
“मुझे यकीन है आप ही नही, अपने सब साथियों के साथ मेरा समय अच्छा बीतेगा.”गीता ने कहा.
हॉस्टेळ पहुँच कर गीता ने अपना सामान अलमारी में रखना शुरू किया. कमरे में माइक्रोवेव और फ्रिज देख कर गीता ने महसूस किया, यह देश अगर समृद्ध है तो उसकी सुविधा भी सबको मिलती है. तभी उसे याद आया माँ और देव उसके फोन का इंतज़ार कर रहे होंगे. वैसे एयरपोर्ट से उसने अपने अमरीका पहुँचने पर घर पर फोन किया था, देव ने फोन रिसीव किया था, पर माँ से बात नही हो सकी थी. माँ मंदिर गई हुई थी अब वह गीता से बात करने को व्याकुल होगी. कल अपने मोबाइल पर यहाँ का सिम कार्ड लेना होगा. तभी रोनाल्ड की काल रिसेप्शन पर आई थी. रिसेप्शनिस्ट ने काल उसके कमरे में ट्रांसफर कर दी थी. दूसरी ओर से रोनाल्ड की चहकती आवाज़ सुनाई दी-
“हेलो, माई डियर फ्रेंड, घर मिस कर रही हो, फोन नही कर सकीं?”
“नहीं, पर तुमने कैसे जाना? अभी मोबाइल पर इंडिया का ही सिम कार्ड है.”अचानक गीता का स्वर रुद्ध हो गया. घर से हज़ारों मील दूर माँ याद हो आई.
“इसीलिए तो आया हूँ. अभी मेरे फोन से काल कर लो कल तुम्हारा सिम कार्ड चेंज करा दूंगा तुम्हारे रूम में आ रहा हूँ, परमीशन तो दोगी?’गीता के जवाब देने के पहले ही दरवाज़े पर रोनाल्ड ने नॉक किया था. दरवाज़ा खोलती गीता विस्मित थी.
“इतनी जल्दी कैसे आ गए, रोनाल्ड?’
“अपनी बेस्ट फ्रेंड की मदद के लिए ये रोमियो हवा में उड़ कर आ सकता है. पहले घर फोन कर लो फिर हम डिनर के लिए बाहर चलेंगे.”अपना मोबाइल गीता को थमा रोनाल्ड आराम से एक कुर्सी पर बैठ गया.
“माँ तुम्हारी गीता बोल रही हूँ. यहाँ आराम से पहुँच गई. कल अपना नया फोन नंबर दे दूंगी, तुम भी फोन कर सकोगी. मेरे लिए परेशान मत होना” गीता ने फोन लगा कर माँ से बात करनी शुरू की थी. “थैंक्स रोनाल्ड, तुमने मेरी परेशानी समझ ली. मै सचमुच घर में माँ से बात करना चाहती थी.”मोबाइल रोनाल्ड को वापस दे कर गीता ने कहा.
“अपने घर से हज़ारों मील दूर एक अनजान देश में आने वाली लड़की की परेशानी समझ सकता हूं,. मुझे पता है अपने घर को लडकियाँ कितना मिस करती है. एक बात और ये जगह रात में अकेले बाहर निकलने के लिए सेफ नहीं है.”
“इस जानकारी के लिए शुक्रिया, पर इस बात को जान कर तो इस रूम से बाहर जाते भी डर लगेगा.”
“कोई बात नही, जब भी जहां भी जाना हो मुझे आर्डर दे देना, रोमियो हाज़िर हो जाएगा. अब चलो डिनर के लिए लेट हो रहे हैं.”
“सॉरी रोनाल्ड, बहुत थकी हुई हूँ, बाहर नहीं जा सकती, हाँ डिनर के इन्वीटेशन के लिए थैंक्स.”
“अच्छा तो यहीं बर्गर या पिज़ा डेलीवर करा लेते हैं वरना तुम भूखी ही सो जाओगी.”
“ऐसा नहीं है, रोनाल्ड. आते समय माँ ने बहुत कुछ खाने का सामान साथ कर दिया है, दो-तीन दिन आराम से कट जाएंगे.”
“कमाल है तुम कस्टम में पकड़ी नहीं गईं वरना खाने का सामान लाने वालों को यहाँ के डॉग पकडवा देते हैं. ओके तो चलता हूँ, अपना मोबाइल कल ले आना, सिम कार्ड चेंज करा दूंगा.”
 “थैंक्स, रोनाल्ड.” विदा देती गीता ने कहा.
गीता सोच में पड़ गई, पहले ही दिन रोनाल्ड की बातें, उसका यहाँ आना क्या ठीक था?  अगर माँ जान पातीं तो क्या सोचतीं. भारत में तो ऐसा संभव नही था, पर रोनाल्ड की बातों में कहीं भी कुछ गलत तो नहीं था. जो भी हो उसका आना अच्छा ही लगा था. कुछ देर को उस नए परिवेश में ऐसा लगा था मानो वह अकेली नहीं है. शायद इसकी वजह यह भी रही हो की परदेश में एक हिन्दी भाषी से बातें करने में अपनापन मिला हो.. वैसे अगर कभी उसने सीमा से आगे बढ़ने की कोशिश की तो गीता ऎसी स्थिति से निबटने की पूरी क्षमता रखती है. अचानक फोन की बेल बज उठी. रिसेप्शनिस्ट ने फोन ट्रांसफर किया था. फोन पर देव की आवाज़ सुनते ही गीता खिल उठी.
“देव तुम, तुम्हारी आवाज़ सुन कर बहुत अच्छा लग रहा है.”
“नए परिवेश में पहला दिन कैसा लग रहा है, मुझे तो ऐसा लग रहा है जैसे अकेला छूट गया हूँ.”
“सच कहूं तो अकेलापन किसे कहते हैं, यहाँ आकर ही महसूस हो रहा है. तुम्हारी और माँ की बहुत याद आ रही है. माँ को तुम्हारे सहारे ही छोड़ कर आई हूँ देव, उनका ख्याल रखना.”गीता रो पड़ी..
“मेरी बहादुर गीता अब कमज़ोर कैसे पड़ रही है. कहो तो मै आ जाऊं. हाँ माँ क्या बस तुम्हारी ही हैं असल में तो मै उनका बेटा हूँ, तुम तो उन्हें छोड़ कर भाग गईं.” देव ने परिहास किया.
“सच कहते हो, अगर तुम हिम्मत न देते तो माँ को छोड़ कर आना कठिन था.”
“अच्छा अब बहुत रात हो गई होगी, सो जाओ और मीठे सपने देख्ना मत भूलना.”
देव से बात करने के बाद गीता के मन का अवसाद जैसे छंट सा गया. उसे पूरा विश्वास है, देव माँ की देख-रेख में कोई कसर नही छोड़ेगा. वह कहता है, अपनी माँ को बचपन में खो कर अब गीता की माँ में अपनी माँ को फिर पा लिया है. देव ने आज कहा, गीता के आ जाने से वह अकेला छूट गया है, यानी जनाब गीता के साथ अपने को पूर्ण पाते है. आज पहली बार देव से यह सुन कर गीता के ओंठों पर हलकी मुस्कान तिर आई.
दूसरे दिन क्लास में जाने के लिए जब वह बाहर निकली तो देखा, रोनाल्ड अपनी मोटर बाइक के साथ हॉस्टेळ के मेंन  गेट पर उसके इंतज़ार में खडा था. गीता को देखते ही चहका-
“हेलो गीता, आज पहले दिन के लिए बेस्ट विशेज देने आया हूँ. मेरे साथ मेरी बाइक भी आपका बेसब्री से इंतज़ार कर रही है. आइए आपको ले चलूँ. मेरी तरफ से ये गुलाब मित्रता के रूप में स्वीकार करे.”बात खत्म करते रोनाल्ड ने एक लाल गुलाब का फूल गीता की ओर बढाया.
“थैंक्स, पर काळेज की दूरी ही कितनी है, मुझे पैदल चलना अच्छा लगता है. वैसे भी मोटर साइकिल पर बैठने से डरती हूँ. इंतज़ार करने के लिए शुक्रिया.”गुलाब लेती गीता ने कहा.
“सॉरी, अगर आपके डर के बारे में पता होता तो कार ले आता, पर आजकल इंडिया में तो लडकियां स्कूटर और मोटर बाइक भी आसानी से चलाती हैं. मेरा ख्याल है, यंग और स्मार्ट लोगों पर तेज़ रफ़्तार वाली मोटर बाइक ही सूट करती है.”मुस्कुरा कर रोनाल्ड ने अपनी और देखा.
“मेरे ख्याल से हम क्लास के लिए लेट हो रहे हैं, वैसे स्मार्ट लोग पैदल चलते भी स्मार्ट ही लगते हैं.”रोनाल्ड के जवाब का इंतज़ार किए बिना गीता ने कदम बढ़ा दिए.
“लंच पर मेरा वेट करना, हम साथ लंच लेंगे.” .पीछे से तेज़ रफ़्तार में जाते रोनाल्ड ने कहा.
पहला सेशन डॉ भाटिया का था. डॉ भाटिया को देख गीता को खुशी हुई, जैसे किसी अपने को देख रही थी. सबका परिचय लेते डॉ भाटिया ने गीता से कहा-
“आज से बीस साल पहले मै भी आपके ही कॉळेज से एम बी बी एस करके आपकी ही तरह यहाँ एम डी करने आया था. उम्मीद है अभी भी एम्स का स्तर उतना ही ऊंचा होगा.”
“जी, अभी भी हमारा कॉळेज इंडिया का बेस्ट कॉळेज माना जाता है.’
क्लास का पहला लेक्चर ही गीता को इम्प्रेस करने को काफी था. उसे लगा अमरीका आकर एम डी करने का उसका फैसला गलत नही था. विभाग में नामी प्रोफ़ेसर और आधुनिक सुविधाओं से उसका उत्साह भी बढ़ गया. लंच ब्रेक होते ही क्लास के बाहर रोनाल्ड उसका इंतज़ार कर रहा था.
“आप क्या खाना पसंद करेंगी, यहाँ पास ही में हर देश का खाना मिलता है.”
“अरे डॉ रोनाल्ड, आप तो ऐसे मेजबानी कर रहे हैं, जैसे मै कोई अतिथि हूँ. आज आप कोई ठीक जगह दिखा दें फिर मै खुद ही चली जाया करूंगी.”
“कमाल करती हैं, अरे भारतीय माँ का बेटा हूँ, आप अभी तो मेहमान ही हैं. चलिए आज आपके साथ इन्डियन रेस्ट्रा में ही चलते हैं.”
कॉळेज के पास की मार्केट में कई रेस्ट्राज़ थे. शेरे पंजाब में पहुँचते ही काउंटर पर खड़े मैनेजर ने रोनाल्ड का गर्मजोशी से स्वागत किया.
“आज बहुत दिनों बाद इधर आए डॉक्टर साहब. कहिए क्या पेश करूं.”
“हमारे साथ ये नई मेहमान दिल्ली से आई हैं, अब अपने यहाँ की बेस्ट डिश सर्व कीजिए.’
“नमस्ते, मैडम. अभी आपकी पसंद की डिशेज़ पेश करता हूँ.” मैनेजर ने वेटर को बुला कर निर्देश दिए”
“इतना सब कैसे खा सकूंगी, कहीं फास्ट फ़ूड ले लेते. क्लास को देर न हो जाए. हाँ बिल मै ही पे करूंगी.”टेबिल पर कई डिशेज देख कर गीता ने कहा.
“एक पुरुष के साथ आई महिला अगर बिल का पेमेंट करे तो उस पुरुष को तो ज़हर खा लेना चाहिए. चल रोमियो मरने को तैयार हो जा.” उसके नाटकीय अंदाज़ पर गीता को हँसी आ गई.
 “एक बात कहनी है, एक-दूसरे के नाम के पहले डॉक्टर लगाने की मुश्किल नही उठानी चाहिए, आप मुझे रोमियो कहें तो बात करना आसान होगा. आपने नोटिस नही किया मै ने आपको गीता ही कहा था.”
“ठीक है, अपने परिचितों के साथ मुझे भी यह औपचारिकता ही लगती है. वैसे भी यहाँ तो अपने पेरेंट्स का भी नाम लेते हैं.”गीता ने अपनी स्वीकृति दे दी.
दिन बीतने लगे. क्लासेस के साथ ही सीनियर डाक्टरों और रेसीडेंट्स के साथ वार्ड में राउंड पर जाते समय गीता सारी बातों पर पूरा ध्यान देती. काम के बीच भी रोनाल्ड उससे मिलने के बहाने खोज लेता. उसके जोक्स पर गीता को हंसी आ ही जाती. अब गीता अपने साथियों के साथ भी सहज महसूस करती थी. एक ब्राजीलियन लड़की से उसकी अच्छी मित्रता भी हो गई थी, पर रोनाल्ड अपने जीवंत स्वभाव के कारण गीता को अच्छा लगता. राउंड के समय सब गंभीर रहते, पर रोनाल्ड अपनी शैतानियों से बाज़ नहीं आता. इतना तो गीता की समझ में आ गया था कि रोनाल्ड में कुछ ऐसा था कि सीनियर डाक्टर भी कभी-कभी उसकी बातों पर हंस पड़ते.
“गीता, तुम एक दिन अपने भारतीय परिधान यानी साड़ी पहन कर आओ, देखना मेरे साथ कितने और डाक्टर दिल के मरीज़ बन जाएंगे.”रोनाल्ड गीता को छेड़ता.
“औरों की बात तो नहीं जानती, पर अच्छा है तुमसे कुछ दिनों के लिए छुटकारा मिल जाएगा.”
“अच्छा तो हम इतने खराब लगते हैं? हम तो आप पर दिलो-जान फ़िदा हैं और आप हैं कि हमसे छुटकारा चाहती हैं. हाय रे रोमियो तू तो गया काम से.”दिल पर हाथ धर रोमियो नाटक करता.
उसके इस नाटकीय अंदाज़ पर गीता को हंसना ही पड़ता. रोनाल्ड की बातों को गीता हंसी में लेती एक दिन रोनाल्ड की माँ ने फोन पर गीता को अपने घर डिनर पर आने का निमन्त्रण दिया तो गीता को अच्छा लगा. इसी बहाने किसी भारतीय महिला से मिलना हो जाएगा. रोनाल्ड से गीता को पता लगता रहता था कि उसकी माँ आज तक अपने भारतीय संस्कारों से जुड़ी हुई हैं. नियत समय पर रोनाल्ड कार से उसे अपने घर ले जाने आ गया. आज वह बेहद खुश था.
“जानती हो, मॉम तुमसे मिलने को कितनी उत्सुक हैं. इसकी वजह यह है कि मै ने तुम्हारी हद से ज़्यादा तारीफें कर रखी हैं.”
“इसका मतलब तुमने मेरी झूठी तारीफें की हैं वैसे तो मै गुड फॉर नथिंग हूँ न?” गीता ने मान से कहा.
“तुम क्या हो, यह कोई मुझसे पूछे वरना पहले दिन से ही क्या ऐसे ही दीवाना हो गया.”
“देखो, रोनाल्ड हमें ऐसा मज़ाक पसंद नहीं है. हम दोस्त हैं और ऐसे ही ठीक हैं.”गीता को याद आया रोनाल्ड को उसके साथ देख एक सीनियर डॉक्टर मार्या ने कहा था,
”रोनाल्ड से दूर रहने में ही भलाई है. यह सिर्फ नाम का ही नहीं असल का रोमियो है. हर नई लड़की पर लाइन मारता है. दो-तीन यंग डॉक्टर लडकियां इसके जाल में फंस कर भारी धोखा खा चुकी हैं.”
“क्या दो दोस्त प्यार नहीं कर सकते? सच कहूं तो बहुत सी लडकियां देखी हैं, उनसे फ्रेंडशिप भी रही, पर तुमसे मिलने के बाद जैसे ये रोनाल्ड सचमुच तुम्हारे प्यार में रोमियो बन गया है.”गीता को सोचते देख रोनाल्ड ने कहा.
 “शायद तुम नहीं जानते मै एंगेज्ड हूँ. इंडिया में देव मेरा इंतज़ार कर रहा है.”
“कमाल है, ये देव कैसा इंसान है जिसने अपनी सोंन चिरैया को अमरीका की उड़ान भरने भेज दिया. अब उसकी चिरैया को खुला आसमान मिला है, मै उसे लौटने नहीं दूंगा.’रोनाल्ड ने गंभीरता से कहा.
“यह देव का मुझ पर विश्वास है, रोनाल्ड.”गर्व से गीता ने कहा.
लेकिन गीता जैसे डर सी गई, रोनाल्ड ने पहले कभी ऎसी बातें नहीं की थीं. इतना ज़रूर था गीता उसके लिए कुछ विशेष ज़रूर थी. सीनियर होने के कारण गीता अपने लिए उसकी केयर स्वाभाविक मानती थी.
रोनाल्ड की माँ माया ने गीता को प्यार से गले लगा लिया, एक क्षण को गीता को अपनी माँ याद आ गई. प्यार से गीता से उसके घर-परिवार की बातें करती गीता को लगा जैसे माया उसकी कोई अपने परिवार की ही सदस्य हो. रोनाल्ड बीच-बीच में अपनी मजाकिया बातों से उन्हें हंसाता रहा.
“गीता, ये मेरा शरारती बेटा, तुम्हारी जितनी तारीफें करता है वह झूठ नहीं हैं. तुममें  सचमुच रूप और गुणों का संगम है. क्यों रौनक, तूने यही कहा था न?”माया ने प्यार भारी नज़र बेटे पर डाली.
“क्या रोनाल्ड का नाम रौनक है, आंटी? इसे तो सब रोमियो कहते हैं.,”
“मेरा बेटा मेरे घर की रौनक है, इसीलिए मै इसे रौनक ही पुकारती हूँ. एक बात कहना चाहूंगी, मुझे आंटी नहीं मौसी कहो तो खुशी होगी.”
“आपको मौसी कहने में मुझे बहुत खुशी होगी. अब से हमेशा मौसी ही कहूंगी.”
माया ने विशुद्ध हिन्दुस्तानी व्यंजन बनाए थे. घर के बने दही बड़े, मटर पनीर, भिंडी के साथ पूरी-कचौड़ी जैसी चीजों ने गीता को घर की याद दिला दी. ‘
“मौसी, आपने तो मेरी फेवरिट डिशेज़ बनाई हैं. माँ अक्सर ये सब बनाती थी.” गीता का गला भर आया.
’”मुझे खुशी है खाना तुम्हे पसंद आया, मै भी तो तुम्हारी माँ जैसी हूँ, रौनक बेटा, तू गीता को जब भी संभव हो घर ले आया कर. मुझे अच्छा लगेगा. रौनक के पापा तो पांच महीनों के लिए लन्दन गए हुए हैं. गीता के साथ  बातें कर के आनन्द आएगा. क्यों गीता तुम आओगी?”
“ज़रूर मौसी, आपसे मिल कर लगा यहाँ भी कोई मेरा है.”गीता ने सच्चाई से कहा.
“अच्छा जैसे हम आपके कोई नहीं हैं, इतने दिनों से तो मै ही आपका था.”रौनक ने शरारत से कहा.
हॉस्टेळ लौटते समय माया भी साथ में आई थीं. रौनक ने लंबी ड्राइव द्वारा गीता को शहर के ख़ास सुन्दर स्थान दिखाते हुए उनके बारे में भी बताया. हॉस्टेळ में उतरती गीता ने फिर कहा-
“आज की शाम बहुत अच्छी बीती. आपकी आभारी हूँ, मौसी.”कार का शीशा उतार रोनाल्ड ने चुपके से कार से उतरती गीता को फ़्लाइंग किस दे डाला.
रात में माँ से बातें करती गीता का उत्साह छलका पड़ रहा था.
“माँ, आज की शाम बहुत अच्छी बीती. रोनाल्ड की माँ ने अपने घर खाने पर बुलाया था. पता नहीं कैसे सारी डिशेज मेरी पसंद की बनाई थीं. बाद में रोनाल्ड ने कार से शहर घुमाया. रोनाल्ड बड़ा मजाकिया है.”
“मुझे खुशी है तेरा परिचय एक भारतीय महिला से हुआ है, पर मेरी एक बात याद रखना, देव से बात करते हुए रोनाल्ड का नाम मत लेना.”माँ ने गंभीर स्वर में कहा.
“क्यों माँ, ऐसा क्यों कह रही हो, देव जानता है दिल्ली में भी मै को-एड कॉळेज में ही तो पढी हूँ.”
“जो भी हो, रोनाल्ड में अपने पिता का अमरीकी खून भी तो है. तू उससे दूर ही रहे तो अच्छा है.”
रात में बेड पर लेटी गीता को रोनाल्ड की बातें याद आने लगीं. मन में गुदगुदी सी हुई, ऎसी बातें देव से कब सुनी थीं. देव से उसकी बातें कितनी औपचारिक जैसी होती हैं. देव कभी ये क्यों नहीं कहता, उसे गीता के बिना कुछ भी अच्छा नहीं लगता, उसे बेहद मिस करता है. काश देव ने भी कभी गीता को फूल ही देकर प्यार जताया होता.
माया अब अक्सर गीता को घर बुलातीं या उससे मिलने आ जातीं रोनाल्ड हंसता,
“मॉम, मुझे लगता है गीता की वजह से तुम मुझे भूलती जा रही हो. कहीं ऐसा तो नहीं तुम इसे अपने हमेशा के लिए अपने घर में रख लो.” मुस्कुराते रोनाल्ड को देख गीता का चेहरा लाल हो आया. उसका इशारा समझना मुश्किल नहीं था.
“तुझे जलन हो रही है, गीता जैसी लड़की को कौन प्यार नहीं करेगा.”माया हंसती.
“यूं आर राइट, मॉम. एक आइडिया, इस बार लौंग वीकेंड में हम सब नियाग्रा फाल क्यों न चलें?’
“वाह, ये तो अच्छा आइडिया है. गीता, नियाग्रा फाल देखना अपने आप में एक अनुभव है. कनाडा की ओर तो इस फाल की सुन्दरता देखते ही बनती है कार से सात-आठ घंटों में हम पहुँच जाएंगे.”
“मुझे माँ से पूछना होगा.”गीता असमंजस में थी.
“मिज़ गीता नाओ ग्रो अप. डॉक्टर बन गईं पर अभी भी माँ के पल्लू से बंधी हो” रोनाल्ड ने चिढाया.
“तू नही समझेगा, रौनक. गीता भारतीय लड़की है, गीता तुम परेशान मत हो, मै तुम्हारी माँ से परमीशन ले लूंगी.”माया ने कहा.
रात में गीता भी उत्साहित थी, उसने नियाग्रा फाल के बारे में बहुत सुना और पढ़ा था. क्या अब वह उसके सौंदर्य को अपनी आँखों से देख सकेगी. मन में शंका थी, पता नहीं माँ अनुमति देगी या नहीं.इसी उधेड़बुन में गीता न जाने कब सो पाई. सुबह फोन की बेल से नीद खुली थी. फोन पर माया मौसी थीं.
“गीता, तेरी माँ ने तुझे हमारे साथ जाने की  परमीशन दे दी है. अब अपने चलने की तैयारी कर ले. दो दिन बाद ही चलना है. हम तुझे तेरे हॉस्टेळ से पिक- अप कर लेंगे.”
“सच मौसी, माँ ने हाँ कर दी है?’ मै तैयारी कर लूंगी.”गीता की आवाज़ में खुशी थी.
रात में माँ से बात की तो माँ ने कहा क्योंकि उसके साथ माया जी भी जा रही हैं सो तसल्ली है. देव ने भी गीता से कहा, उसने भी सोचा था विवाह के बाद वह भी गीता के साथ नियाग्रा फाल देखने ज़रूर जाएगा, पर उसे बहुत खुशी है कि गीता को अच्छा चांस मिल रहा है, उसे जाना ही चाहिए. अपनी शुभ कामनाएं देना भी देव नहीं भूला. देव के प्रति गीता आभारी थी, उसने कितने विश्वास और प्यार से बात की थी. क्या सचमुच देव उसके साथ नियाग्रा का सौंदर्य देखने की चाहत रखता था, पर अपने मन की बात कभी गीता से क्यों नहीं कह सका. जाने की खुशी ने गीता को और सोचने नहीं दिया.
जाने के दिन गीता सो कहाँ पाई, पैकिंग करते समय अनायास ही अपने फेवरिट सलवार सूट भी रख लिए. कनाडा में कोई काम नहीं करना है तो अपने मनपसंद भारतीय परिधान क्यों न पहने? रोनाल्ड ने मोबाइल से सूचित किया था, वह बाहर उसका वेट कर रहा है.
“माया मौसी कहाँ हैं, रोनाल्ड?” हम उनके बिना नहीं जा सकते.”रोनाल्ड कार में अकेला ही था.
“तुम बैठो तो, उन्हें पिक- अप कर लेंगे. वह अभी तौयार नहीं हैं.”
तेज स्पीड में दूसरे रास्ते से जाती कार ने गीता को परेशान कर डाला.
“रोनाल्ड, हम किस रास्ते से जा रहे हैं, ये तो तुम्हारे घर का रास्ता नहीं है.”
“ठीक कह रही हो, गीता डियर. सॉरी, मॉम हमारे साथ नहीं आ रही हैं. लन्दन में डैड को अवार्ड मिल रहा है, मॉम को आज ही लन्दन जाना है.”
“तुमने झूठ क्यों कहा, अभी हमें वापस जाना है..”गीता ने तेज़ आवाज़ में कहा.
“काम डाउन , गीता. मॉम ने कहा हम दोनों मैच्योर हैं, जब प्रोग्राम बनाया है तो उस पर अमल करना ही चाहिए. बिलीव मी, मुझसे कोई गलती नही होगी. मेरे साथ तुम बिलकुल सेफ हो.”
“मेरी माँ इस बात को अप्रूव नहीं करेंगी.”
“अपनी बेटी को हज़ारों मील दूर भेज दिया तब चिंता नही की, हम तो बस कुछ घंटों की दूरी पर जा रहे हैं. अब सब भूल जाओ, जब तुम अपनी आँखों से नियाग्रा फाल देखोगी तो सब भूल जाओगी.”विवश गीता शांत होना पड़ा.
रोनाल्ड अपनी बातों से उसका मन बहलाता रहा.. अमरीकी बार्डर पार करते ही दूर से भारी संख्या में सैलानियों की भीड़ दिखाई दे रही थी. होटल पहुँच कर गीता अपने रूम में फ्रेश होने चली गई. मन में धुकधुकी थी जब माँ को पता लगेगा वह रोनाल्ड के साथ अकेली आई है तो वह ज़रूर नाराज़ होगी और देव पता नहीं उसका क्या रिऐक्शन होगा. कॉफ़ी और स्नैक्स लेते ही रोनाल्ड ने गीता से कहा-
“अब यहाँ देर नहीं करनी है, हमें एक-एक मिनट एंज्वाय करना है.”
जगमगाती रोशनी में रेलिंग के किनारे ढेरों सैलानी ऊपर से गिरते प्रपात का सौन्दर्य देख रहे थे. गीता उस अनुपम दृश्य को देख विस्मित थी. ऐसा लग रहा था चांदी पिघल-पिघल कर झरने के रूप में गिर रही थी. पानी इतना स्वच्छ कहीं एक तिनका तक नज़र नही आ रहा था. गीता को भारत की पवित्र नदी याद आ गई जहां अमृत जैसा जल विष होता जा रहा है.
दृष्टि घुमाते कई आलिंगनबढ जोड़े चुम्बन करते दिख रहे थे. उनकी चेष्टाएं नितांत खुलेपन की सीमा को पार करती दिखाई पड़ रही थीं. गीता की संकुचित दृष्टि का अनुसरण करते रोनाल्ड के ओंठों पर शरारती मुस्कान आ गई.
“जानती हो गीता, यहाँ कुछ जोडियाँ हनीमून को आती हैं कुछ हमारी तरह सिर्फ मौज-मस्ती के लिए और बहुत से लोग एक दूसरे से अलग होने के पहले यहाँ मित्र की तरह अंतिम विदा लेने के लिए आते हैं..”
अपनी बात खत्म करते रोनाल्ड ने अचानक गीता को अपनी बाहों में ले कर उसके ओंठों पर गहरा चुम्बन जड़ दिया. एक हाथ से अपने फोन से फोटो लेने में भी देर नही की.
“छोडो रोनाल्ड, ये क्या कर रहे हो? “रोनाल्ड की बांहों की गिरफ्त से अपने को छुड़ाती गीता चीख पड़ी.
“अरे इसमें परेशान होने की क्या बात है? तुम बच्ची तो नहीं हो, इस देश में किस करना मामूली बात है. देखो हमारी फोटो कितनी अच्छी आई है.”
“यहाँ के लिए किस मामूली बात है, पर मै जहां से आई हूँ, वहां ये अधिकार सिर्फ पति का होता है. तुमने गलत काम किया है, रोनाल्ड. अब तुम्हारे साथ और रुकना संभव नही है हाँ, पहले वो फोटो इरेज़ करो..”गीता के आंसू बह निकले.
“ओह माई डियर, फोटो किसी को दिखानी थोड़ी है, ये तो बस मेरे पास यादगार की तरह रहेगी, आई प्रॉमिस.”रोनाल्ड ने यकीन दिलाया.
“नहीं तुम ऎसी फोटो नहीं रख सकते, मुझे अब तुमसे बात नहीं करनी है..”
“ओके, लो इसे मिटा देता हूँ, प्लीज़  मुझे माफ़ करो, पर ज़रा चारों  ओर निगाह डाल कर देखो, इस रोमांटिक माहौल में कौन न बहक जाए, स्पेशली जिसके साथ तुम जैसी इतनी खूबसूरत लड़की हो. तुम समझ नहीं सकतीं तुम्हारा साथ किसी को भी पागल बना दे, पर मै सच्चे दिल से तुम्हे प्यार करता हूँ. चाहो तो आजमा लो, तुम्हारे देव पर भारी पडूंगा.”रोनाल्ड गंभीर था.
“मुझे ये बकवास नहीं सुननी है. मै देव की अमानत हूँ, तुमने मुझे अपराधिनी बना दिया. पता नही देव मुझे स्वीकार कर सकेगा या नहीं.”गीता का चेहरा विषादपूर्ण था.
“अगर सिर्फ इतनी सी बात पर देव तुम्हे त्याग दे तब तो वह सच्चा प्रेमी कतई नहीं हुआ. वैसे इसी बात पर उसका टेस्ट हो जाए. देख लेना परीक्षा में तुम्हारे देव पर मै भारी पडूंगा. मेरा यकीन सच निकलेगा.” “किस परीक्षा की बात कर रहे हो? देव से बराबरी की कोशिश मत करना. जो भी हो, अब मुझे यहाँ बिलकुल नहीं ठहरना है. मै जा रही हूँ.’ गीता मुड़ कर चल दी.
““हैव पेशेंस माई डियर, वक्त आने पर देव के प्यार का सच जान जाओगी, पर प्लीज़ वापस जाने की बात मत करो, मॉम मुझे ज़िंदा नहीं छोड़ेगी. पक्का वादा करता हूँ ऎसी गलती दोबारा नहीं करूंगा. जो सज़ा देना चाहो मंजूर है. माफ़ कर दो.”रोनाल्ड ने अपने कान पकड़ कर कहा.
“सच कह रहे हो, तुम पर यकीन नहीं होता?’गीता ने अविश्वास से कहा.
“बिलीव मी, सौ प्रतिशत सच कह रहा हूँ.. वैसे भी बोट से इस झरने को बिलकुल पास से देखना अमेजिंग एक्सपीरिएंस होता है. अगर वो अनुभव नहीं किया तो कुछ नहीं देखा.”
“क्या, इतने विशाल झरने के पास जा सकते हैं?”गीता विस्मित थी.
“कल सवेरे खुद देख लोगी. सवेरे हम जल्दी आएँगे, शायद तुम थक गई होगी चलो आराम कर लो.”
सवेरे दोनों जल्दी ही उठ गए. रात की घटना भूल, गीता उस नए अनुभव के लिए उत्साहित थी. बड़ी सी बोट में बहुत से पर्यटकों के लिए जगह थी सबको नीले रंग के रेन- प्रूफ कोट पहनने थे. नाव की रेलिंग पकडे गीता प्रपात की ओर बढ़ती नाव से झरने को पास आता देख अभिभूत थी. क्या यह सच था या सपना? झरने की नन्हीं-नन्हीं बूँदें शरीर के खुले अंगों का स्पर्श कर सिहरा रही थीं. अचानक एक जर्क लगने पर गीता डर से पास खड़े रोनाल्ड से लिपट गई. रोनाल्ड ने उसे बांहों में ले कर तसल्ली दी थी.
“डरो मत स्वीट हार्ट. मेरे रहते तुम्हे कुछ नहीं हो सकता..”रोनाल्ड ने अपने से लिपटी गीता की फोटो लेने में देर नही की.
“तुम फिर शुरू हो गए, अपना वादा भूल गए.”गीता नाराज़गी से अलग हट गई.
“इस बार मेरी कोई गलती नहीं थी, तुम खुद मेरे पास आईं थीं.” गीता को चुप देख रोनाल्ड हंस पडा.
“तुम जानते हो, मै डर गई थी, प्रॉमिस करो, तुम ये फ़ोटोज़ एरेज़ कर दोगे.”
“ओके बाबा, एरेज़ कर दूंगा. तुम इन्डियन लड़कियों की यही अदा मुझे भाती है.”
“तुम कितनी इन्डियन लड़कियों को जानते हो?’
“एक तुम ही क्या काफी नहीं हो?” बात टाळ कर रोनाल्ड गुनगुनाने लगा.
पूरे दिन बार-बार नियाग्रा को देख कर भी गीता का मन नही भर रहा था. एक ओर उतनी ऊंचाई से गिरता जल-प्रपात और चारों ओर बिखरी हँसी-खुशी से जगमगाती दुनिया उसे किसी स्वप्न लोक जैसी लग रही थी. वापसी में भी जब तक दृष्टि जा सकती वह पीछे छूटते मनोरम दृश्य को मुड़-मुड़ कर देखती रही.उसकी इस बात पर रोनाल्ड मज़ाक करने से नहीं चूका.
“डोंट वरी, हम अपने हनीमून के लिए यहीं आएँगे, मंजूर है न?’
“शट अप, घर चलो, माया मौसी से तुम्हारी शिकायत करूंगी, तब पता लगेगा.”
“वह तो बहुत खुश होंगी, तुम क्या अब तक नहीं समझीं गीता?.”रोनाल्ड ने हंस कर कहा
“नहीं ये सच नही है, वह तुम पर ज़रूर नाराज़ होंगी..”अचानक गीता जैसे डर गई ,कहीं वो किसी जाल में तो नहीं फंसी जा रही थी. जो भी हो अब वह रोनाल्ड और मौसी से दूरी बनाए रखेगी.
रात में देर तक गीता सो नही पाई. माँ या देव से फोन पर बात करने का साहस ही नहीं कर सकी. उन्हें वह कैसे बताएगी कि वह अकेले रोनाल्ड के साथ दो दिन बिता कर लौटी है. रोनाल्ड का चुम्बन जैसे ओंठों पर चिपक गया था, रोनाल्ड की सबल बांहों का आलिंगन और उसकी बातें उसके लिए नए अनुभव थे. मन न जाने कहाँ की उड़ान भर रहा था..गीता अपने आप से डर रही थी. दो दिन बाद माँ को फोन करने की बात सोच गीता ने फोन नहीं किया. माँ से झूठ बोल पाना भी तो ठीक नही था. पता नहीं माँ रोनाल्ड के साथ उसके अकेले जाने की बात को कैसे स्वीकार कर सकेगी.
सुबह आँख फोन की बेल पर खुली थी. फोन पर देव था, अपनी शांत आवाज़ में उसने बात शुरू की थी-
“हेलो, गीता. कल ही लौटी होगी, तुम्हारी थकान की सोच कर फोन नहीं किया. विश्वास है तुमने खूब एंज्वाय किया होगा. अब जल्दी ही तुमसे आँखों देखा हाल सुनूंगा. माँ कुछ दिनों के लिए एक शादी में गाँव गई हैं. वह तुम्हे फोन नहीं कर सकेंगी, जाते-जाते तुहारा समाचार लेते रहने को कहा है. माँ तुम्हें बहुत मिस करती हैं.”
“हाँ, देव नियाग्रा सचमुच दर्शनीय है. तुम कैसे हो?”गीता ज़्यादा कुछ नहीं पूछ सकी.
“मुझे क्या होना है, बस तुम्हारी चिंता रहती है. मै एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के सिलसिले में एक दूर के एरिया में दस दिनों के लिए जा रहा हूँ. कुछ ज़रूरी इन्फौर्मेशन लेनी हैं. उन दिनों तुम्हे कॉन्टैक्ट नहीं कर सकूंगा. अपना ख्याल रखना. बाय.”
फोन रख कर गीता कुछ आश्वस्त हुई अच्छा है, माँ से अभी बात नहीं हो सकेगी. देव ने कहा माँ उसे मिस करती हैं और खुद वो क्या उसे मिस नहीं करता? पता नहीं वह कहाँ जा रहा है, पर उससे बात करके संतोष हुआ. हॉस्पिटळ जाने के लिए तैयार होना है. अचानक उसे लगा क्या अब वह रोनाल्ड के साथ पहले जैसा सामान्य व्यवहार कर सकेगी. उसके लिए चुम्बन एक मामूली बात है, पर गीता- - ऊंह अपने ख्यालों को झटक, वह तैयार होने चली गई.
डिपार्टमेंट में रोनाल्ड को न देख जैसे वह निराश सी हो गई. तभी पीछे से किसी ने कंधे पर हाथ रखा
“मिसिंग मी, देखो आगया. सच कहूं तो तुम्हारी याद में रात भर सो नही सका, लग रहा था कब सवेरा हो और तुमसे मिलूँ. तुम्हारी भी यही हालत थी न?”रोनाल्ड चहका.
“बिलकुल नहीं, मुझे तो बहुत अच्छी नींद आई और तुम्हें मिस करने का तो सवाल ही नही है. आज नहुत काम है पेशेट्स की रिपोर्ट्स डॉकटर स्टीव को देनी हैं. प्लीज़ डोंट डिस्टर्ब मी.”
“वाह क्या अंदाज़ है, इसी अदा पर तो मरता हूँ.”रोनाल्ड अविचलित था.
तभी डॉकटर स्टीव के आने से रोनाल्ड अपने डिपार्टमेंट की ओर चला गया.
दिन बीतते गए. गीता अपने को काम में बिजी रखती, पर माँ और देव से बात न हो पाने की वजह से खालीपन महसूस करती. रोनाल्ड उसे छेड़ता रहता, गीता अपने को उससे न चाहते हुए भी दूर रहने की कोशिश करती पर उसकी बातें मन में गुदगुदी ज़रूर करतीं. अक्सर गीता सोचती रोनाल्ड ने कौन सी परीक्षा की बात कही थी? जिस परीक्षा पर उसे उसे पूरा यकीन है जो गीता को रोनाल्ड के पास आने को मजबूर कर देगी? उसे पेशेंस के साथ इंतज़ार करना होगा. गीता सोच में पड़ जाती, न जाने वह किस परीक्षा की बात कर रहा है और आज देव के फोन ने सब स्पष्ट कर दिया-
“किसी रोनाल्ड ने अपने आई फोन से ली गई फ़ोटोज़ भेजी हैं और साथ ही तुम्हारे साथ अपने प्यार की बात भी स्पष्टता से लिखी है. उसकी बात पर यकीन करना संभव नहीं है. तुमसे जानना चाहता हूँ क्या उसने जो कुछ लिखा है, वो बात सच है?”
पलांश में जैसे सब कुछ शीशे की तरह साफ़-साफ़ दिख गया था, रोनाल्ड ने गीता को धोखा दिया, ये बात समझने में कोई शंका नहीं रह गई, तो ये थी उसकी परीक्षा? उसने कहा था नियाग्रा में गीता की धोखे से ली गई फ़ोटोज़ उसने एरेज़ कर दी हैं. कितनी सफाई से उसने अपनी चाल चली थी.
“क्या हुआ गीत, तुम चुप क्यों हो?”देव का स्वर व्यग्र था.
“नहीं देव, ये सच नहीं है, मानती हूँ, रोनाल्ड ने गलत हरकत की, पर उसका यूं फ़ायदा उठाना कतई अक्षम्य अपराध है उसने अचानक धोखे से फोटो खींची थीं. अब उसका मकसद साफ़ है, मुझे माफ़ कर दो, देव. तुम्हें पहले ही यह कड़वा सच बता देना चाहिए था, पर साहस नहीं कर सकी.”गीता रो पड़ी.
“जानता हूँ जिस पर अपने से भी ज़्यादा विश्वास है, उससे किसी ऎसी बात की उम्मीद भी नहीं कर सकता. तुम्हें अपने से अधिक चाहा है, तुम्हारी खुशी में मेरी खुशी है, गीत. अगर ये सच बात है तो भी मुझे मंजूर है, प्यार जबरन तो नहीं किया जा सकता.”गंभीर स्वर में देव ने कहा.
नहीं, देव आज सब कुछ साफ़-साफ़ देख पा रही हूँ, तुम, बस तुम ही मेरे आराध्य हो. तुम्हारे सिवा मुझे और कुछ नहीं चाहिए. जल्द ही तुम्हारे पास भारत लौट रही हूँ.”गीता ने अपना फैसला सुना दिया.
“तुम्हारी ये गलती स्वीकार नहीं करूंगा. तुम जिस सपने के साथ गई हो, उसे पूरा कर के ही वापस आओगी, यह मेरा आदेश है.”देव ने दृढ़ता से कहा.
“पर, देव अब यहाँ कैसे रह पाऊंगी?”गीता की वाणी में असमंजस था.
“मेरा विश्वास और प्यार तुम्हारे साथ है फिर कोई रोनाल्ड क्या कर सकता है? अपने देव के प्यार की ताकत तुम शायद नहीं जानतीं, वही तुम्हारी ढाल बन कर तुम्हारा संबल बनेगा.”देव ने परिहास किया.
“तुम सचमुच देवता हो, देव. कभी तुम्हारे विश्वास को ठेस नहीं पहुंचाऊंगी, ये मेरा वादा है.”
“कहने की ज़रुरत नहीं, अपनी गीत को जानता हूँ, मेरे मन में कोई शंका, बोझ नहीं है. बहुत देर हो गई अब सो जाओ. शुभ रात्रि.”शान्ति से अपनी बात समाप्त कर देव ने फोन रख दिया.
मोती जैसे बहते आंसुओं के साथ गीता को सब कुछ स्पष्ट दिख रहा था. आज अगर वह देव को खो देती तो अपनी किसी बहुत प्यारी चीज़ के खोने का दुःख क्या होता है, वह महसूस कर रही थी. रोनाल्ड की बात देव ने कैसे सही होगी? काश देव उसके सामने होता और वह कह सकती- नहीं देव नहीं, ये सत्य नहीं है. गीता बस तुम्हारी ही है. तुम्हारे गाम्भीर्य में मेरे लिए सच्चा प्यार है, बिना जताए, बिना कुछ कहे मेरी हर बात का ध्यान रखना, मुझ पर अपने से अधिक विश्वास करना, तुम्हारा मेरे लिए प्यार ही तो है. तुम्हारे उस विश्वास के बल पर ही तो माँ मुझे अमरीका भेज सकीं.
दूसरी ओर रोनाल्ड है, अपनी हरकतों से प्यार का दावा करता रहा. क्या उसने किसी और के साथ ऎसी ही बातें नहीं की होंगी? आज सब कुछ साफ़ देख-समझ रही है, नियाग्रा फाल मुझे अकेले अपने साथ ले जाने के पीछे उसकी योजनाबद्ध चाल थी. उसने उसी का पूरा फायदा उठाया देव को फोटो भेज कर उसने अपनी चाल सिद्ध कर दी है. देव के प्यार में सागर की गहराई है और रोनाल्ड की बातें छिछली नदी की तरह हैं, जिसमे धोखे और झूठ का विदेशी रंग मिला हुआ है. समझ गई हूँ, मै ने रोनाल्ड को कभी प्यार नहीं किया, अगर कुछ था तो वो बस एक क्षणिक मृगतृष्णा भर थी. मुझे विश्वास है अपनी गीत को तुम ज़रूर माफ़ करोगे, देव. मृगतृष्णा या छलावा कुछ देर के लिए भरमा सकता है, पर स्थायी नहीं हो सकता. देव का उसके लिए प्यार उसकी निधि है, उसे वह कभी नहीं खो सकती.
बिस्तर पर लेटी गीता एक नई सुबह का इंतज़ार कर रही थी. उसे रोनाल्ड को बताना है, वह देव के सामने सिर्फ हारा ही नहीं अपनी ओछी हरकत की वजह से उसने गीता की मित्रता को भी हमेशा-हमेशा के लिए खो दिया. आँखे बंद किए गीता अपने देव के सपनों में खो गई.

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