पीले गुलाबों के साथ एक रात


फ़र्स्ट क्लास कूपे में अकेली ही थी कि तभी ढेर सारे पीले गुलाबों के अधखिले, प्लास्टिक की बाल्टी से झाँकते फूलों के साथ एक सैनिक अफसर ने प्रवेश किया।
बाल्टी कम्पार्टमेण्ट की खिड़की के पास रख, एक हल्की मुस्कान के साथ मेरी ओर देखकर कहा, ।
पूरी रात आपको मीठी खुशबू मिलती रहे, गुड नाइट! कुछ पूछने का मौका दिए बिना वह जा चुका था। समझ में नहीं आया, क्या रेल-विभाग ने प्रथम श्रेणी के यात्रियों के लिए यह विशेष पुष्प-सेवा प्रारम्भ की थी? पाँच मिनट बाद एक सौम्य-सुन्दर महिला आ गई थीं। उम्र को चेहरे से पढ पाना मुश्किल था। उनकी गम्भीरता प्रौढ़ता को छू रही थी और चेहरे का भोलापन कच्ची उम्र का भ्रम दे रहा था।

कहाँ तक जा रही हें? प्रश्न पूछती वह मेरे समीप बैठ गई थी।

इलाहाबाद।

चलो, अच्छा है, साथ रहेगा।

ये फूल ................?

हाँ, कल सुबह इलाहाबाद में जेम्स का अन्तिम संस्कार है। आपको पता है, वहाँ अन्तिम संस्कार कहाँ होता है?

एक अज्ञात भय से मैं जड़ हो गई।

नहीं, मुझे नहीं पता, शायद गंगा के किनारे कहीं होता होगा। पर आप तो शायद क्रिश्चियन हैं न?

ठीक कहती हैं, हम क्रिश्चियन्स में मृतक दफनाए जाते हैं, पर आजकल कुछ क्रिश्चियन्स भी हिन्दू रीति से अन्तिम संस्कार चाहते हैं। जेम्स की भी आखिरी इच्छा यही थी।

ओह!

,ट्रेन लेट तो नहीं होगी? इसके लेट होने का तो प्रश्न ही नहीं उठता। सीधे दिल्ली से चलकर बस कानपुर और इलाहाबाद ही रूकेगी।

अन्तिम संस्कार तो दस बजे के पहले नहीं होगा कहती महिला के चेहरे पर आश्वस्ति के भाव उभर आए थे।

मेरी दृष्टि बार-बार पास रखे पीले फूलों पर अटक जाती थी। इतने सारे पीले गुलाबों के मध्य एक भी लाल गुलाब नहीं? फूल हमेशा से मुझे बहुत प्रिय हैं, पर आज यह अहसास बार-बार सिहरा जाता था कि पास रखे ये फूल, जो अभी पूरी तरह खिल भी नहीं आए हैं, शायद सुबह होने तक ठण्डी हवा के कारण खिल जाएँ। कुछ देर बाद ही ये मुस्कराते फूल एक निर्जीव शरीर के निकट होंगे तो क्या उस शरीर पर इनकी मीठी गंध कोई प्रभाव डाल सकेगी? क्या ये सुगन्ध उस सुप्त शरीर को मीठी नींद से जगा सकेगी? महिला के चेहरे पर भी उन्हीं फूलों जैसी उदास सुन्दरता थी। शायद मेरी दृष्टि उन फूलों पर गड़ी देख वे बोली थीं, जेम्स को पीले गुलाब के फूल बहुत पसन्द थे। इसीलिए दिल्ली से ले-जा रही हूँ ताकि आखिरी बार उसकी पसन्द का उपहार दे सकूं।

जेम्स आपके कौन थे?

मेरा होने वाला पति..

आई एक साँरी, विवाह के पूर्व ही चले गए- बहुत दुःख है।

कुछ अजीब-सी हॅंसी के साथ वे बोली थीं,

जेम्स की पत्नी और बेटा इलाहाबाद में ही हैं।

क्या?

जेम्स एक बड़ा हार्ट स्पेशलिस्ट था। दो सप्ताह पूर्व दिल्ली एक मेडिकल काँन्फ्रेंस में आया था। कांफ्रेंस के बीच ही हार्ट .अटैक हो गया। दो हफ्ते दिल्ली के अस्पताल में मुश्किल से रहा। डाँक्टरों ने उसे छह सप्ताह तक आराम लेने को कहा था पर वह जिद पर अड़ गया-अपने घर जाऊॅंगा, अपने लाँन में पहुंचते ही ठीक हो जाऊॅंगा। मजबूर होकर दिल्ली के एक डाँक्टर के साथ उसे वापस इलाहाबाद भेजना पड़ा था, पर दो दिन भी तो वह पूरे नहीं कर पाया। आज प्रातः उसकी पत्नी का स्पेशल मेसेज मिला- अपने पुराने घर में अन्तिम साँस तोड़ते जेम्स ने अपने लिए हिन्दू विधि से अन्तिम संस्कार की इच्छा व्यक्त की थी। जेम्स से कभी भी न मिलने की कसम इस मेसेज पर तोड़नी पड़ी।

मेरे मुख पर आए विस्मय को देखकर ही वे कहती गई थीं-

जेम्स जब मेडिकल काँलेज के अन्तिम वर्ष में था, तब मैं अंग्रेजी विषय लेकर एम ए कर रही थी। पड़ोसी होने के साथ ही हमारे परिवारों में बहुत घनिष्ठता थी। कीड़े-मकोड़ों को पकड़ उनके अंग-प्रत्यंगों को बचपन से ही जेम्स जिस रूचि से देखता था, उसकी वही रूचि मेरे मन में वितृष्णा जगा जाती थी।

तुम कित्ते गन्दे हो जेम्स!"

वह मुक्त हो हॅंस पड़ता था। जेम्स के घर के सामने एक छोटा-सा बाग था, उसी में एक ओर गुलाबों की क्यारी थी। कहीं से एक नंन्हां सा गुलाब का पौधा लाकर मैने गुलाबों की क्यारी में रोप दिया था। हमारा घर जेम्स की ऊपरवाली मंजिल पर था, अतः अपना बागबानी का शौक जेम्स के गाँर्डेन से ही पूरा कर लिया करती थी। बहुत उत्सुकता से हम दोनों उस पौधे के बड़े होने का इन्तजार करते रहे। जेम्स कभी उसमें जरूरत से ज्यादा खाद डालता तो कभी मैं पानी की नदी बहा देती। किस रंग का गुलाब खिलेगा, हम शर्त लगाते रहते थे। सचमुच जिस दिन उसमें पीले रंग की कली दिखाई दी, जेम्स खुशी से फूल उठा-

देखा लिली! येलो रोज, आई लव येलो कलर।

वह पीला गुलाब कब खिले, हम जैसे पागल हो उठे थे। दो दिन बाद जब अपने पूर्ण दर्प के साथ पीला गुलाब खिला, हम दोनों उसे विस्मय-विमुग्ध निहारते रह गए थे। और जिस दिन वह पीला गुलाब झड़ा, उसकी पंखुड़ियाँ बीन हम दोनों ने अपनी-अपनी किताबों में समेट ली थीं। फूल की एक-एक पंखुरी के झरते लगता जैसे हमारे सपने झर रहे हैं। इसीलिए उन सपनों को अपनी पुस्तकों में हम कैद करते गये।

पढ़ाई पूरी कर जेम्स जब मेडिकल काँलेज में मृत्यु से जीवन के लिए संघर्ष करता, मैं अंग्रेजी विभाग के सामने फेले हरे लाँन के किनारे लगे मौलश्री के पेड़ों की छाया तले बैठ शेली और कीट्स की मनचाही पंक्तियाँ दोहराती-गुनगुनाती रहती। जेम्स हाउससर्जन के रूप में काम कर रहा था। अकसर आकर अस्पताल में हुई मौतों और दुर्घटनाओं का वर्णन कर मेरा मूड खराब कर दिया करता था।

सच कहना जेम्स, हर दिन मौत को इतना करीब देखते तुम्हें दुःख नहीं होता? मैं कहती।

पहले होता था, पर अब तो रूटीन जैसा हो गया है। ये मरना-जीना तो चलता ही रहता है। मेरे खयाल से तो आदमी को अगर कुछ बनना है तो नितांत व्यावहारिक होना चाहिए।

तुम बहुत क्रूर हो! सच, सारे डाँक्टर एकदम हृदयहीन होते हैं।

मेरी आँखों में सीधा देख ऐसा कह सकती हो? मंद स्मिति के साथ जेम्स ने पूछा था।

लाज से आँखें नीची हो गई थी? घर के सामने पीले गुलाबों की अब एक अलग क्यारी बन गई थी।

बहुत सुनहले पीले गुलाब हमारे मध्य कब उग आए, हमें पता ही नहीं लगा ।

शहर में कोई अजीब बीमारी फैली थी। तेज बुखार के साथ खून की उल्टियाँ होते ही रोगी अचेत हो जाता था। कई लोग मृत्यु के मॅुंह में जा चुके थे। तेज बुखार आते ही मैं किस कदर भयभीत हो उठी थी! जेम्स ने जैसे ही मेरी नब्ज देखने को हाथ पकड़ा, मैं फफक पड़ी थी।

अब नहीं बचूंगी जेम्स! अगर मुझे कुछ हो जाए तो दफनाना नहीं, जला देना। मैं नहीं चाहती, कब्र में कैद मेरी आत्मा छटपटाती रहे।

प्यार से, मेरे माथे पर बिखर आए बालों को हटाते हुए जेम्स ने कुछ नहीं कहा। बस, तुरन्त बाहर चला गया।

एक सप्ताह बाद जब मैं पूर्णतया स्वस्थ हो गई तो सन्तरे की फाँक थमाते जेम्स ने शैतानी से पूछा,

तो मरने के बाद आपकी तमन्ना है कि इस सुन्दर देह को जला दिया जाए?

सच जेम्स, मैं हमेशा सोचती हूँ, जब मैं रही ही नहीं तो बेकार अपने नाम की जगह घेरने से क्या फायदा? पीढी दर-पीढी लोगों को फूल चढ़ाने की खानापूरी करनी पड़ती है न?

गम्भीर जेम्स ने कहा था,

पता नहीं केसे अपने प्रिय को लोग जला देते हें। तुम नहीं हो पर धरती के एक कोने में तुम सो रही हो- सोचकर क्या अच्छा नहीं लगेगा?

बिल्कुल नहीं! तुम्हीं कहो, जिस रूप में मैं सो रही होऊॅंगी उसे बार-बार देखने की तुम्हारी इच्छा होगी? नहीं जेम्स, एक निर्जीव शरीर के प्रति वितृष्णा हो सकती है, प्यार नहीं। इसलिए उस रूप में मैं नहीं रहना चाहती, मुझे तो तुम...............।

उत्तर के पूर्व जेम्स का सबल हाथ मॅुंह बन्द कर गया था।

जेम्स को अमरीका जाने की छात्रवृत्ति मिल गई थी। जेम्स के सपने आकाश छूने लगे, वहाँ से आते ही एक प्राइवेट नर्सिंग होम खोलूंगा। हार्ट सर्जरी में स्पेशलाइज कर तहलका मचा दूंगा। हाँ, सबसे पहले तुम्हारा हार्ट ट्रांसप्लांट करूँगा। इतने कमजोर दिल वाली लड़की मेरी पत्नी नहीं बन सकती। जरा-जरा-सी बात पर रोने लगती हो, डरपोक कहीं की! तुम्हारे लिए तो एक फौलादी दिल तैयार करूँगा।

मम्मी ने कई बार मुझसे पूछा

क्या जेम्स के अमरीका जाने के पहले शादी सम्भव नहीं है?

जेम्स की माँ मम्मी की बात सुनते ही नाराज हो गई थीं,

वहाँ लड़का रिसर्च करने जा रहा है, वाइफ को लेकर क्या खाक काम करेगा? शादी तो लौटकर ही होगी। दो साल की ही तो बात है, तब लिली एम ए पूरा कर सकती है।

जेम्स ने बात हॅंसी में टाल दी थी,

सपोज, मैं वहाँ किसी और लड़की को चाहने लग जाऊॅं तो क्यों बेकार पहले ही बन्धन में बॅंध जाऊॅं? ठीक है न?

मेरी डबडबाई आँखों पर जेम्स शैतानी से हॅंस पड़ा था, मैं खीझ उठी थी। जेम्स की विवशता मैं समझती थी। यह सच था, जेम्स की स्काँलरशिप में मेरा गुजारा असम्भव था, फिर अमरीका आने-जाने के लिए लम्बी रकम भी हम कहाँ से लाते?

जाने के पहले मम्मी की जिद और जेम्स के आग्रह पर जेम्स की मम्मी इंगेजमेंट के लिए राजी हो सकी थीं। उंगली में अॅंगूठी पहनाते जेम्स ने धीमे से कहा,

अब मेरी कैद में हो। डर था, मेरे पीछे कोई उड़ा न ले जाए। दो साल बाद आकर देखूंगा, अॅंगूठी ढीली नहीं होनी चाहिए। अपनी परवाह रखना, एक-एक इंच का हिसाब लूंगा।

मैं मुस्करा दी थी।

जेम्स ने दो की जगह पूरे पाँच वर्ष लगा दिए थे। शुरू के पत्रों में उत्साह और उल्लास छलका पड़ता था। अचानक उन पत्रों के मध्य कैथरीन का शोख युवा चेहरा यदा-कदा झाँकता दिखाई पड़ने लगा। एक बार हॅंसी में लिखा था,

कहीं तुम्हारे विभागाध्यक्ष की सुन्दरी कन्या कैथरीन, लिली का स्थान तो नहीं ले रही है? कुछ ज्यादा ही तुम्हारी परवाह करती लग रही है।

जेम्स ने लिखा था,

कैथरीन पीले गुलाब-सी है। अगर 'लिली' से ज्यादा पसन्द आ जाए तो क्या आश्चर्य है? तुम तो जानती ही हो, पीले गुलाब मेरी 'कमजोरी' हैं। फिलहाल अभी तक तो लिली से ही जुड़ा हूँ। डोंट वरी माई लव!

लिली न जाने क्यों जेम्स के आश्वासनों पर भी आतंकित होती गई। दो वर्ष की लम्बी अवधि कटने के पूर्व ही जेम्स ने लिखा था,

विभागाध्यक्ष उसे और ऊॅंची छात्रवृत्ति के साथ शोध-कार्य करने का आग्रह कर रहे हैं। इस शोध से उसका जीवन बन जाएगा।

बात एकाध वर्ष की और थी। जेम्स के घर में अमरीका से आने वाली सौगातों ने उसे सहर्ष शोध जारी रखने की अनुमति दे दी थी।

मम्मी परेशान थीं- और दो-चार वर्षों में तो लड़की बूढ़ी हो जाएगी। अब तो जेम्स की छात्रवृत्ति दो व्यक्तियों के गुजारे के लिए पर्याप्त थी। अमरीका जाने के लिए भी मम्मी धन जोड़ देने के लिए प्रस्तुत थीं, पर जेम्स की ओर से जरा-सा भी आग्रह न था। इस बीच कई प्रस्ताव आए। मम्मी ने दबी जुबान उन पर सोचने के लिए भी कहा, पर जेम्स के अलावा किसी अन्य की कल्पना भी मेरे लिए असम्भव थी। तीन वर्षों बाद जेम्स के पत्रों का सिलसिला लगभग टूट-सा गया। जेम्स की मम्मी से हालचाल पूछने पर एक ही उत्तर रहता था, वह वहाँ पढ़ने गया है, पत्र लिखने में फालतू समय वेस्ट नहीं करता।

पाँच वर्षो बाद जेम्स मिसेज कैथरीन जेम्स और एक सात मास के बेटे के साथ वापस आया था। जेम्स की मम्मी ने गोरी-चिट्टी मेम बधू पाकर अपने भाग्य को सराहा।

अरे, इण्डिया की क्रिश्चियन सोसाइटी में जेम्स के लायक लड़की ही कहाँ मिलती? उसे अपना कैरियर भी तो देखना था। इतना बड़ा हार्ट सर्जन है। आखिर उसे ऊॅंची सोसायटी में मूव करना है।

जेम्स के आने की खुशी में एक पार्टी का आयोजन किया गया था। एक पीले मुरझाए गुलाब के साथ इंगेजमेंट रिंग और शुभकामनाएँ छोटे भाई द्वारा जेम्स तक भेजकर मैं अॅंधेरे कमरे की खिड़कियाँ तक बन्द करके बैठ गई थी। मम्मी बड़बड़ाती रह गई,

बेशर्मी की भी हद होती है! प्रभु जरूर इस अन्याय का बदला देगा।

कानों पर उॅंगली रख वह चीख उठी थी,

मम्मी, प्लीज चुप रहो! मम्मी सहम गई थीं।

फूल देखता जेम्स एक पल मौन रह गया था- भाई कहता गया - जेम्स व्यस्तता के कारण लिली के पास नहीं आ सका, समय पाते ही वह जरूर आएगा। पर अब क्या लिली के पास जेम्स के लिए समय शेष रह गया था?

जम्मू के एक काँलेज में अॅंग्रेजी प्राध्यापिका पद के लिए डाँक्टर लिली को बार-बार बुलाया जा रहा था, पर मम्मी न जाने किस आशा में उसे रोके हुई थीं। पार्टी के दूसरे दिन सुबह लिली किसी की न सुन जम्मू के लिए निकल पड़ी थी। तब से वह वहीं की होके रह गई थी। घर से आए पत्रों द्वारा ज्ञात होता रहता था कि जेम्स ने एक प्राइवेट नर्सिग होम खोल लिया है। उसकी शहर में बहुत प्रतिष्ठा है। साथ ही यह भी सुनती रही-

नये बॅंगले के सामने पुराने घर से पीले गुलाब के सारे पौधों को निकलवाकर लगवाया है। जेम्स बार-बार लिली से मिलने आने का आग्रह करता रहा, पर लिली हमेशा उसके आने के दिनों में अतिव्यस्त या कहीं बाहर ही रही। कैथरीन के एकाध पत्र आए थे। वह उस लिली से मिलना चाहती थी, जिसकी जेम्स हमेशा प्रशंसा किया करता था। लिली हर पत्र के उत्तर में मात्र अविचलित रही।

कल फोन पर कैथरीन ने बताया- जेम्स उसकी बहुत याद करता है! और आज सुबह उसी कैथरीन ने बताया कि जेम्स की आखिरी ख्वाहिश है, उसका अन्तिम संस्कार हिन्दू रीति से किया जाए और इसकी सूचना लिली को जरूर दी जाए। सूचना पाते ही लिली रूक नहीं सकी। प्लेन से दिल्ली आई और अब यह ट्रेन पकड़ी है।

यू नो! उसने मेरी भावनाओं की कद्र की। वह अन्दर से हमेशा मुझे चाहता रहा, वरना क्या बरीयल की जगह मेरी इच्छा के ही अनुसार हिन्दू रीति से अन्तिम संस्कार माँगता? गाँड ब्लेस हिज सोल। उसकी आवाज भीग गई है।

मेरी निगाह फिर पास रखे पीले गुलाबों पर अटक गई।




कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

यह ब्लॉग खोजें

Previews