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10 जून 2021

अपराजित जय

अम्मा देखो हम क्या लाए हैं.’ खुशी से उमगती रीना ने घर में घुसते ही माँ को आवाज दी।“

ऐसा क्या ले आई जो घर को सर पर उठाए जा रही है.।“’ताई.ने नाराजगी दिखाई।

जिस दिन से रीना की सहेली मीना ने अपने शानदार कपड़ों का रहस्य रीना को बताया, तब से वह माँ के पीछे पड़ गई थी

अम्मा, मंगल राम की शॉप मे बहुत नई डिजाइन के कपड़े मिलते है. मैं भी वहां से अपने लिए सलवार- सूट खरीदूंगी. मीना कितने अच्छे कपड़े पहनती है.” आज वह सचमुच इतना सुन्दर अपना मनपसंद गुलाबी रंग का सलवार-सूट और कुछ साड़ियाँ खरीद कर माँ को विस्मित करने वाली थी.

ऐसा कौन सा खजाना ले आई है जो ऐसे चहक रही है?” ताई ने झिडकी दी.

जब देखोगी तब जानोगी, ताई.” हाथ में पैकेट थामे रीना की आँखे चमक रही थीं. ताई और माँ दोनों रीना के लाए हुए सुन्दर कपड़े देख कर विस्मित थीं.

वाह, तू तो सच में बहुत अच्छे कपड़े ले आई है। माँ ने खुशी ज़ाहिर की।‘’

मेरी बात मान शीला, ये कपड़े रीना की शादी के लिए रख दे।‘’ताई ने रीना की माँ को सलाह दी।

नहीं, हमे शादी नहीं करनी है। हम एम ए के बाद पीएच डी कर के यूनीवर्सिटी में प्रोफेसर बनेंगे।“

सुन रही है शीला, तेरी बेटी के क्या रंग हैं। ये शादी नहीं करेगी मास्टरनी बनेगी।“

बिलकुल ठीक कह रही है, हमारी रीना बेटी प्रोफेसर ज़रूर बनेगी। इसकी बुद्धि का ही तो परिणाम है जो हर क्लास मे प्रथम स्थान पर रहती है। हाँ शीला, कल अपनी कार से मेरा एक मित्र कानपुर जा रहा है, उसके साथ जाकर नीना बेटी को वापिस ले आऊँगा। नानी, मामी से उसने बहुत प्यार करवा लिया। दो दिन तुम्हारे भाई-भाभी से मैं भी खातिर करवा लूँगा।“राकेश जी ने परिहास किया।“

सच कह रहे हैं , नीना की छुट्टियाँ भी लंबी हो गई है। नीना के बिना रीना तो अपनी पढ़ाई में लगी रहती है वरना दोनों बहिनें कितनी बातें करके घर में रौनक लगाए रखती थीं।“ शीला ने कहा।

दो बेटियों के पिता प्रोफेसर राकेश वर्मा लड़कियों की शिक्षा और उनकी स्वतन्त्रता के प्रबल समर्थक थे। पत्नी शीला द्वारा लड़कियों को अधिक पढ़ाने पर विरोध करने पर वह कहते-

ज़माना बादल गया है, शीला। आज लड़कियां हर क्षेत्र में लड़कों के समकक्ष ही नहीं, कई स्थानों में उनसे आगे हैं। मैं तो कहता हूँ, तुम भी अपनी बी ए की पढ़ाई पूरी कर लो।“

““मुझे तो माफ कीजिए, अब बेटियों के भविष्य के विषय में सोचना है।“

अपने पापा के लिए चाय बनाती रीना सोच रही थी काश जय अभी फ्रांस न गया होता. ये गुलाबी सूट पहिन कर जब वह जय के सामने जाती तो वह उसे देखता ही रह जाता. जय रीना का पड़ोसी था. रीना समझ गई थी उसकी हर बात, हर अदा का जय दीवाना था । प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष रूप में वह अपने दिल की बात रीना के सामने रखता रहता था. उसकी मुग्ध आँखें रीना को अच्छी लगती थीं. दोनों के बीच प्रेम अपने मूक रूप में मुखर रहता था. एम् बी ए में टॉप करने के बाद जय किसी मल्टीनेशनल कम्पनी में जॉब लेकर रीना के सपने पूरे करना चाहता था.

शादी के बाद तुम्हें क्या चाहिए रीना, अपनी लिस्ट अभी से तैयार कर के दे दो.”

हमें तो एक बड़ा सा घर चाहिए, लेक्सस या मर्सिडीज़ कार हो जिसमें ळॉंग ड्राइव पर जाएं.” रीना इतरा कर कहती॰

आपके सारे सपने पूरे होंगे रीना , बस हुक्म करती जाइएगा, ये बन्दा तो आपके हुक्म का गुलाम है। आपके सपने पूरे करने के लिए ही तो किसी बड़ी मळ्टीनेशनळ कम्पनी में जॉब का इंतज़ार है.”

सच कहो जय, तुम हमारे सपने सच में पूरे करोगे या यूंही हमें झूठे सपने दिखा रहे हो?”रीना जय से पक्का वादा चाहती।“

तुमसे क्या कभी झूठ कहा है, रीना, अपने प्यार पर तुम्हे कैसे यकीन दिलाऊँ?”

हो सकता है यही बात तुमने किसी और लड़की से भी कही हो। एक बात जान लो, अगर कभी ऐसा हुआ तो मुझे कतई मंजूर नहीं होगा.”रीना धमकी देती।

ऐसा तुम सोच भी कैसे सकती हो?

सचमुच जय को फ़्रांस की एक मल्टीनेशनल कम्पनी में जॉब मिल गया। एक माह की ट्रेनिंग पर फ्रांस जाने के पहले अकेले में विश्वास के साथ रीना से कहा था-

“‘अब तुम्हारे सपने पूरे करने का वक्त आ गया है, मेरा इंतज़ार करना। करोगी न? कहीं और किसी के लिए हाँ मत कर देना।“

जय की बात के उत्तर में चुप रह कर भी रीना ने अपनी स्वीकृति दे ही दी थी, सपने पूरे होने की कल्पना से आई खुशी चेहरे पर स्पष्ट थी।

रीना और जय की भेंट एक डिबेट में हुई थी । डिबेट में लड़कियों पर लड़कों ने व्यंग्य किए थे कि लड़की होने के कारण उन्हें कई अतिरिक्त लाभ मिलते हैं। उत्तर में रीना ने जोरदार शब्दों में विरोध में कहा था –

भीख में मिले बड़े से बड़े लाभ के स्थान पर वह मखमल की जगह टाट चुनेगी। राजसी भोग की जगह स्वाभिमान की सूखी रोटी स्वीकार करेगी। लड़कियां कमजोर नहीं होतीं जो उन्हें किसी पक्षपात जैसी बैसाखी की ज़रूरत हो। समय आने पर वह अपनी क्षमता से ही आगे बढ़ेंगी ‘ रीना के तेजस्वी शब्दों ने उसके मुख की लालिमा बढ़ा दी थी। रीना को प्रथम पुरस्कार दिया गया था। जय के मन ने कहा सौंदर्य और मेधा का अपूर्व संगम इस लड़की में साकार है. डिबेट के बाद जय ने रीना को सच्चे मन से बधाई दी थी।

विश्वास है, आज आपने जो कुछ कहा, उससे लड़कियों को अवश्य प्रेरणा मिलेगी । पुरस्कार और विजय के लिए हार्दिक बधाई।“

धन्यवाद, आपने ज़्यादा ही बड़ाई कर दी। हमे जो सच लगा वही कहा है।“नज़र उठा कर को देखने पर एक लंबा हैंडसम युवक दिखाई दिया था।

मैं जय, एम बी ए करने के बाद जॉब की तलाश है। आपके परिचय से तो जान ही गया आप केवल जोरदार डिबेटर ही नहीं, टॉपर भी रही हैं।

यह संयोग ही था कि जय के पापा के ट्रांसफर के कारण जय का परिवार रीना के घर के पास वाले पुलिस अधिकारी के बंगले में रहने को आ गया था। जय के पिता राम शरण शहर के ईमानदार पुलिस अधिकारी के रूप में प्रसिद्ध थे।

पास-पास घर होने के कारण आते जाते जय और रीना की अक्सर मुलाक़ात होने लगी। पता नहीं, ये मुलाकातें अकस्मात होती थीं या जय जानबूझ कर रीना के बाहर आने-जाने के समय रीना से मिलने का बहाना खोज लेता था। जब से जय को पता लगा रीना पास वाले पार्क में हर शाम को घूमने जाती है, उस दिन से जय को भी रोज़ पार्क जाने की आदत बन गई थी।

पड़ोसी होने के कारण जय और रीना की मित्रता बाग के फूलों के साथ खिलती गई। दोनों की वैचारिक समानता, तीक्ष्ण मेधा और जीवंत व्यक्तित्व परस्पर एक होते गए। उनके बीच बढ़ती नज़दीकियाँ कब प्यार में बदल गईं दोनों ही नहीं जान सके। एक-दूसरे के साथ दोनों अपने को पूर्ण पाते, समय पंख लगा कर उड़ जाता।

जय के फ्रांस जाने के बाद जय की अनुपस्थिति का एक-एक दिन रीना को भारी लगता। अब तो उसे जय की प्रतीक्षा थी, उसके आने के दिन काटना मुश्किल लग रहा था। भविष्य के प्रति दोनों आश्वस्त थे। दोनों के परिवार उदार विचारों वाले होने के कारण जय और रीना को अपना जीवन साथी चुनने की स्वतन्त्रता का पूर्ण विश्वास था

जय के फ्रांस चले जाने के बाद भी जैसे वह उसके पास ही था. उसकी बातें भला भूली जा सकती थी. उसे बस जय की वापसी का इंतज़ार था. काश उसके पास मोबाइल फ़ोन होता तो जय के साथ बातें करना कितना आसान होता. पत्र लिखने का तो प्रश्न ही नहीं उठता था, घर के फ़ोन से क्या जय के साथ प्यार की बातें की जा सकती थीं? इतना ज़रूर था कि एक नियत दिन और समय पर दोनों पास के पीसी ओ से बात कर के कुछ देर के लिए अपना प्यार जी लेते थे। जय कहता-

काश तुम भी मेरे साथ होतीं, तुम्हें बहुत मिस करता हूँ।“

रहने दो, जानती हूँ, वहाँ की गोरी फ़ैशनेबल लड़कियों के बीच हीरो बन रहे होगे। वहाँ की लड़कियां बहुत तेज़ होती हैं, डर लगता है, कहीं तुम मुझे भूल ना जाओ।“

तुम्हारी बात में सच्चाई तो ज़रूर है। कल ही एक लड़की जेनी मेरी बातों से इतनी इंप्रेस होगई थी कि मेरे साथ इंडिया आने को तैयार थी।“

देखो जय तुम सच तो नहीं कह रहे हो, हमसे किया वादा तो नहीं भुला दोगे?”रीना की आवाज़ मे नमी थी।‘

बस इतना ही विश्वास है अपने जय पर? जय के जीवन में बस एक ही प्यार है, उसका नाम रीना है। यह सच है, फ्रांस बहुत सुंदर देश है, पर तुम्हारे बिना सब सूना है। इफिल टॉवर पर प्रेमियों के जोड़ों को देख कर तुम बहुत याद आईं। वादा है, शादी के बाद हम दोनों फ्रांस ज़रूर आएंगे।“

तुम्हारे साथ मेरे लिए कोई भी जगह दुनिया की सबसे ज़्यादा सुंदर जगह होगी। आजकल इंडिया में कोरोना महामारी के कारण लॉक डाउन में घर में कैद हूँ। तुम्हारी वापिसी के दिन गिन रही हूँ, जय।“

सॉरी रीनू, अब तुम्हें कुछ दिन और इंतज़ार करना होगा. ट्रेनिंग के सिलसिले मे मुझे अगले दस दिन के लिए इटली जाना है, बहुत एकसाइटेड हूँ।“

क्या इटली जाना ज़रूरी है? समाचार आरहे हैं, इटली में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या बहुत बढ़ रही है। अपना ध्यान रखना, काश तुम जल्दी वापिस आ जाते।“

इटली से सीधे तुम्हारे पास पहुँच रहा हूँ। बस जल्दी ही अपनी रीना के साथ होऊंगा। तुम्हारे लिए क्या लाऊं, यहाँ की स्मार्ट लड़कियों की फ़ैशनेबल ड्रेस ज़रूर पसंद करोगी। जब वो ड्रेस पहिन कर बाहर जाओगी तो लोग तुम्हें इटालियन ब्यूटी समझेंगे।“

ज़रूर, बस शर्त ये होगी कि उसी ड्रेस में तुम अपने पेरेंट्स से मुझे उनकी होने वाली बहू के रूप में मिलवाओगे।“रीना ने भी मज़ाक का उत्तर दिया था।

 उनसे भले ही ना मिलवाऊँ, पर अपनी रीना को तो उस ड्रेस मे ज़रूर देखूंगा। तुम पर उस ड्रेस की शान बढ़ जाएगी। भला मेरी रीना के आगे कोई ठहर सकता है, वह तो अतुलनीय है ।“।

अंतत: लंबी प्रतीक्षा के बाद वह दिन आ ही गया, आज जय अपनी रीना के पास वापिस आ रहा था। जय के घर को फूलों से सजाया गया था। जय के स्वागत के लिए उसके पिता के अतिरिक्त कुछ पुलिस के अधिकारी, शहर के सम्मानित व्यक्ति उपस्थित थे। रीना का वश चलता तो वह स्वयं भी जय को लेने एयरपोर्ट जाती। अब तो बस कुछेक देर बाद जय अपने घर में होगा।

धड़कते दिल के साथ रीना आपने घर की खिड़की के पास जय की एक झलक पाने को खड़ी जय की प्रतीक्षा कर रही थी। एक महीने के बाद कैसा लगता होगा उसका जय? प्रतीक्षा का एक-एक पल भारी पड़ रहा था।

प्रतीक्षा की घड़ियाँ समाप्त हुईं। सबसे पहली कार से जय उतरा था। नीले सूट में जय का व्यक्तित्व बहुत प्रभावशाली लग रहा था। कार से उतरे जय की नज़र खिड़की पर खड़ी रीना पर पड़ी थी। हल्की मुस्कान के साथ हाथ हिला अपना प्यार जता दिया था। रीना का वश चलता तो दौड़ कर नीचे जा कर जय के गले लग जाती, पर अभी तो कुछ और प्रतीक्षा करनी थी। ना जाने कितनी देर में लोग जय को छोड़ेंगे।

पूरी रात रीना ने जाग कर बिताई थी। अचानक सवेरे चार बजे फ़ोन की घंटी सुनते ही रीना ने फ़ोन कान से लगाया था।

कैसी हो रीना? जेट लैग की वजह से नींद नही आ रही है। मन तो, सबको छोड़ कर तुम्हारे पास आने को बेचैन था। काश हम मिल पाते। माफ़ करना तुम्हें जगा दिया, पर मेरे दिल पर मेरा वश कहाँ रह गया है।”

अगर तुम जाग रहे हो तो क्या तुम्हारी रीना चैन से सो सकती है? अपने दिल को किस तरह से रोका है, बता नहीं सकती। कल पार्क में पहुंचने का बहाना सोचना पड़ेगा, पर उतना इंतज़ार कठिन होगा। “

एक और समस्या है, चौदह दिनो तक मुझे क्वारेंटीन में रहने को कहा गया है। वो तो पापा पुलिस में सीनियर एस पी हैं इसलिए मुझे अपने घर में ही सबसे अलग रहने की शर्त पर रहने दिया गया है।

 ओह नो, क्या इतने दिनों बाद भी हम नहीं मिल सकेंगे, क्यों जय?”

मैं इटली में एक वीक तक रहा हूँ, वहाँ कोरोना संक्रमित व्यक्तियों की काफी बड़ी संख्या है, इसलिए मुझे सबसे अलग रहना होगा। वैसे तुम्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है, मैं पूरी तरह से स्वस्थ हूँ। तुमसे मिले बिना क्या मैं ज़िंदा रह सकता हूँ? जल्दी ही मलने का कोई रास्ता निकालता हूँ।“

मुझे उस दिन का बेसबरी से इंतज़ार है, जय। जल्दी ही कोई रास्ता निकाल लो।“

तुमसे ज़्यादा तो मैं तुमसे मिलने को बेचैन हूँ। आज तुम्हें खिड़की में खड़ी देख जी चाहा कैसे तुम तक पहुंच कर तुम्हें सीने से लगा लूँ.”

इतने सवेरे किसका फ़ोन आया है, रीना। कोई खराब खबर तो नहीं है?’ अचानक रीना की माँ ने आवाज़ दी थी-

नहीं, अम्मा रांग नंबर है।“रीना ने फ़ोन रख दिया.

चार दिन बेचैनी में बीत गए। एक-दूसरे की झलक पाने को दोनों बेचैन थे, पर कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा था।

गणेश चतुर्थी पर्व के कारण शहर में धूम थी। आज गणपति विसर्जन का शोर था। जय के घर में बहुत लोग जमा थे। गीत-भजन के साथ कुछ देर बाद गणपति को सम्मान से उठाए जय के पापा बाहर आए थे। रीना की माँ भी स्त्रियों के साथ जारही थीं। क्वारेंटीनके कारण घर में रुकने को विवश जय कैसे बाहर जा सकेगा? यही सोच कर रीना ने गणपति विसर्जन में न जाने का निर्णय लिया था। सबके जाने के बाद अचानक किसी ने रीना के दरवाजे पर दस्तक दी थी।

दरवाजा खोलती रीना जय को देख खुशी से पागल हो गई।

जय तुम क्या सच में हो?”

क्यों क्या कुछ ही दिनो में अपने जय को भुला दिया।, मैं तो दिन-रात अपनी रीना का नाम रटता हूँ।“ बात खत्म कराते जय ने रीना को अपनी बाँहों में प्यार से बांध लिया।

सब कुछ भूल कर दोनों कुछ पलों के लिए एक-दूसरे में खो गए।“

अगर किसी को पता लग गया तो बहुत गड़बड़ हो जाएगी। हमे अलग रहना चाहिए।“ अचानक कुछ चैतन्य हो कर रीना ने कहा।

किसी को नहीं पता लगेगा, मेरे घर का सिक्योरिटी गार्ड मेरी शिकायत करने की हिम्मत भी नहीं करेगा।“कुछ गर्व से जय ने कहा।

नहीं जय, हम अपने पेरेंट्स को धोखा नहीं दे सकते। हमे समझदारी से काम लेना चाहिए। कुछ ही दिनो की तो बात है फिर तो जीवन भर हमे साथ ही रहना है। “प्यार और शांति से रीना ने कहा।“

लगता है तुम्हारा मेरे लिए प्यार खत्म होगया है।“ कुछ नाराजगी से जय ने कहा।

नहीं, जय तुम्हारे लिए प्यार मेरी संजीवनी है। तुम्हारे बिना हम जीवित नहीं रह सकते, पर आजकल भारत में भी सोशल डिस्टैंसिंग पर ज़ोर दिया जा रहा है।“

इसका अर्थ यह है कि तुम्हें शायद डर है कि मेरे पास आने पर तुम कोरोना की शिकार हो जाओगी यकीन करो ऐसा कुछ नहीं होगा । विश्वास से जय ने कहा।

भगवान ना करे, तुम्हें कभी कोरोना तो क्या कोई छोटी सी भी तकलीफ़ हो। तुम्हारी हर तकलीफ़ मुझे मिले, यही प्रार्थना रहेगी। तुम्हारी मनपसंद कॉफ़ी बनाती हूँ, मेरे हाथ की बनी कॉफ़ी भूले तो नही हो?’“प्यार से रीना ने कहा।

मैं कुछ नहीं भी भूला हूँ ,रीना तुम ठीक कह रही हो, मुझे यहाँ आने का रिस्क नहीं लेना चाहिए था। अब चौदह दिन बाद ही मिलूंगा।“कहते हुए रीना के माथे पर चुंबन जड़ जय चला गया.

रीना समझ नही सकी क्या जय नाराज़ हो कर गया है? शायद वह कुछ ज़्यादा ही बोल गई थी, कहीं उसके शब्दों ने जय को आहत तो नही किया था? अपने मन को समझाती-नहीं, हमारा प्यार इतना कच्चा नहीं हो सकता। अब जो भी हो, उसे प्रतीक्षा करनी होगी। तीन-चार दिन बेचैनी में कट गए अचानक एक दिन जय का फोन आया था-

कैसी हो रीना? जानता हूँ मेरी तरह तुम भी एक-एक दिन एक-एक युग की तरह से बिता रही हो, बस अब कुछ दिन ही तो हमारे बीच में शेष हैं, फिर तो हम साथ-साथ होंगे।“बात करता हुआ जय खांसी आने के कारण रुक गया।

क्या हुआ जय, तुम ठीक तो हो? इतना खाँस क्यों रहे हो और तुम्हारी आवाज़ भी भारी लग रही है। हमे डर लग रहा था, कहीं हमने तुम्हें नाराज़ तो नहीं कर दिया था। “रीना व्याकुल थी।

अरे कुछ नहीं हुआ है,भला अपनी रीना से कभी सपने में भी नाराज़ हो सकता हूँ। इटली और इंडिया का मौसम फ़र्क है, थोड़ा जुकाम हो गया है। अदरक की चाय पीते ही ठीक हो जाऊंगा।, कोरोना नहीं हुआ है।“जय ने परिहास किया.

नहीं जय, तुम्हारे घर के पास डॉक्टर नाथ का क्लीनिक है, उनके पास जाकर चेक- अप करा लो। आजकल कोविड महामारी से सावधान रहना ज़रूरी है।“ रीना के स्वर में चिंता थी।“

ओके भला अपनी बॉस की बात टाल सकता हूँ ।“मज़ाकिया अंदाज़ में जय ने कहा।

तीन दिन बीत गए जय का कोई फ़ोन नहीं आया। रीना को पल भर का भी चैन नहीं था। जय ने कोई खबर नहीं दी थी। उसके घर फ़ोन लगाने का सवाल ही नही था।

चौथे दिन खिड़की से जय के घर पर नज़र डालते ही पुलिस विभाग की एंबुलेंस खड़ी देख, रीना डर गई। एंबुलेंस किसके लिए आई थी? बिना कुछ सोचे दरवाजा खोल रीना ने दूर खड़े अस्पताल के कर्मचारी से पूछा था-

एंबुलेंस किसके लिए आई है, कौन बीमार है?”

एस पी साहब का बेटा जो अभी बाहर के देश से आया है, उसे कोरोना हो गया है। आप दूर रहिए, पास आने में खतरा है।“

 नहीं, ये नहीं हो सकता।“ रीना की आँखों से बेतहाशा आँसू बह निकले।

आप यहाँ से चली जाइए, उन्हें सबसे अच्छे अस्पताल में ले जारहे हैं।वह ठीक हो जाएंगे।“कर्मचारी ने रीना को आश्वस्त किया।

घर से रीना को माँ की पुकार सुनाई दी। न चाहते हुए भी लौटना रीना की मजबूरी थी।आँसू पोंछती रीना ने घर के अंदर जाते हुए मुड़ कर देखा था उसके जीवंत जय को स्ट्रेचर में लाया जा रहा था। एंबुलेंस में स्ट्रेचर रख कर एंबुलेंस का दरवाजा बंद कर दिया गया। निर्जीव सी रीना शिथिल कदमों से किसी तरह घर पहुंची थी।

कहाँ घूमती फिरती रहती है, जानती है ना आजकल बाहर निकलने में खतरा है। तेरे पापा भी जब से नीना को लाने कानपुर गए हैं ,लॉकडाउन हो जाने की वजह से कानपुर में ही रहने को मजबूर हैं। कुछ हो जाने पर मैं अकेली क्या करूंगी?”

माँ जय को कोरोना हो गया, उसे अस्पताल ले गए हैं।“ रीना का स्वर रुद्ध था।

अरे यह तो बहुत बुरा हुआ, अब हमे बहुत सम्हल के रहना है। पास के घर मे कोरोना आ गया है। अब तू घर से बिलकुल बाहर नहीं जाएगी ।“माँ चिंतित थी।

अनुत्तरित रीना अपने कमरे में गणपति की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़ कर रो पड़ी।“

बप्पा, आपको मेरे जय की रक्षा करनी है। आप सबके पिता हैं, अपनी इस बेटी के लिए उसका जय वापिस लाना ही होगा। अपने पर मेरा विश्वास खंडित मत होने देना। आज से जब तक मेरा जय वापिस नहीं आ जाता बस एक समय खाना खाऊँगी।“ माँ से कुछ न कह रीना अपनी रोटियाँ और खाना चुपके से अपनी प्यारी गाय को खिला आती और खुद भूखी सो जाती। रात -दिन कभी भगवान से प्रार्थना करती कभी मृत्युंजय मंत्र का तो कभी गायत्री मंत्र का जाप करती, उसकी उदासी देख माँ परेशान होती।

तुझे क्या हो गया है, रीना, चेहरा ऐसा कुम्हलाया सा लगता है। हंसी तो जैसे भूल ही गई है?’

कुछ नहीं माँ, नीना और पापा के बिना अच्छा नहीं लगता।“

परेशान मत हो, तेरे पापा जल्दी आने की कोशिश कर रहे हैं।“

दस दिन बीत गए, देर रात में फ़ोन की रिंग पर रीना किसी भावी आशंका से काँप गई। साहस कर के फ़ोन उठाया था।

हमारा प्यार जीत गया, रीना। तुम्हारे प्यार ने कोरोना को पराजित कर दिया, मैं बिलकुल ठीक हो कर कल अस्पताल से डिस्चार्ज हो कर घर पहुंच रहा हूँ।“ जय का उत्साहित स्वर फोन पर था।

सच, जय? धन्यवाद, बप्पा आपने अपनी बेटी की प्रार्थना सुन ली। हमारा विश्वास खंडित नहीं होने दिया। समझ नहीं पा रही हूँ, ये सच है या कोई सपना।? रीना की आवाज़ में खुशी छ्लकी, पड़ रही थी।

जिस दिन डॉकटर ने कोरोना-संक्रमण की पुष्टि की मैं स्तब्ध रह गया था, बस तुम याद आई थीं। कितनी ठीक थीं तुम और मैं तुम्हारे उतने नजदीक आने की कैसी नादानी कर बैठा था। विश्वास करो उस समय भय हुआ था, मेरी उस दिन की नादानी के कारण तुम कोरोना संक्रमित ना हो जाओ।“ जय की आवाज में बेहद प्यार की सच्चाई थी।

नहीं, जय अपने को दोष मत दो। ये तो हमारी परीक्षा थी जिसमे हम सफल हुए हैं। ईश्वर हम पर अपनी कृपा बनाए रखें, यही प्रार्थना है। आज इस खुशी में बहुत दिनो बाद रात का खाना खाऊँगी।“अचानक रीना के मुंह से उसका सच निकल गया ।

क्या, तुम इतने दिनो से एक समय खाकर रही हो? इसका अर्थ है मेरे कारण तुम अपने को दंडित कर रही थीं। इस सज़ा का तो मैं उत्तरदायी हूँ, बताओ मेरे लिए क्या सज़ा मिलनी चाहिए?”जय की आवाज़ में कंसर्न था।

सज़ा तो ज़रूर मिलेगी , पर पहले बताओ हॉस्पिटल में तुम्हें कोई तकलीफ तो नही हुई?”

वास्तविकता यह है कि वहां डॉकटर के रूप में एक देवदूत डॉकटर रोहित के प्रेरक शब्दों ने मुझे कोरोना से लड़ कर उस पर विजय पाने की शक्ति दी थी।“

वो कैसे, जय? अस्पताल मे ढेरों मरीजों के बीच कोई डॉकटर एक-एक मरीज को कैसे समय दे सकता है।“

शायद मैं भाग्यवान था। मुझे उदास और डरा हुआ देख हल्की मुस्कान के साथ डाक्टर रोहित ने पूछा था-‘

सुना है फ्रांस और इटली की यात्रा से कोरोना की सौगात लाए हो, जय। वैसे इन देशों की यात्रा तो शानदार रही रही होगी।?”

क्या मैं मर जाऊंगा डॉकटर? प्लीज़ मुझे बचा लीजिए, मुझे जीना है।“

नाम तुम्हारा जय है और तुम कोरोना से डरते हो? मुझे तो विश्वास है तुम जैसे नवयुवक जिनके जीवन का लक्ष्य निश्चित है, जिनके आसपास प्यार करने वाले हों, उन्हें तो अपनी दृढ़ आत्म शक्ति में विश्वास होना चाहिए। अगर तुम्हारी कोई गर्ल फ्रेंड है तो वह भी तुम्हारे लिए जरूर प्रार्थना कर रही होगी। अगर मेरी बात सच है तो अपने नाम को सार्थक करो। तुम कोरोना से लड़ कर विजय पा सकोगे, जय।“

आप सच कह रहे हैं, डॉकटर क्या साहस रखने से कोरोना पर विजय पा सकूँगा?” उस माहौल में मुझे उनके शब्दों से कितनी शक्ति मिली बता नहीं सकता।“

मेरी तो यही सोच है। कोरोना की विभीषिका में लोगों का डर उनसे कोरोना से लड़ने की शक्ति छीन लेता है। अपने पर विश्वास रखने से दवाइयाँ भी असर करती है।” डॉकटर ने कहा।

शायद उनकी बातों का ही असर था कि डर की जगह स्वस्थ होने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगा दी थी और आज उनका कथन सच होगया, कोरोना को हरा कर विजय पाई है।“

तुम्हारी इस विजय में मेरी प्रार्थना और तपस्या का भी हाथ है, जय। दिन-रात बस तुम्हारी कुशलता की ही प्रार्थना करती थी। मेरी पूजा सफल रही, अब जीवन में और कोई चाह नही है।“

तुम्हारी तपस्या के लिए तुम्हारा जय तुम्हें कुछ देना चाहेगा, बताओ तुम्हें क्या चाहिए”।

ठीक है, अब भविष्य में मुझे अकेला छोड़ कर इतने लंबे समय के लिए कभी नहीं जाओगे।“

अच्छा जी, इसका सीधा अर्थ यह है कि अब मेरी आज़ादी के दिन समाप्त हुए और आपके हुक्म पर चलना होगा।“

बिलकुल ठीक समझे जनाब, जितने दिन आप हॉस्पिटल में रहे, हमने जो असहनीय दुख सहा उसकी भरपाई तो करनी ही होगी।“

आपकी सज़ा मंजूर है, बस मेरी भी एक शर्त है, जीवन भर मेरे साथ मेरी जीवन साथी बन कर रहना होगा। जल्दी ही तुम्हारा हाथ मांगने तुम्हारे घर पहुंचने वाला हूँ।“

तुम्हारा प्रस्ताव अवीकृत हो गया तो क्या करोगे?”

पक्का विश्वास है प्रस्ताव स्वीकार होगा, अगर नहीं हुआ तो घर के सामने भूख हड्ताल पर बैठ जाऊंगा। मुझ जैसा प्यार करने वाला दूसरा कौन हो सकता है, जिसने अपनी रीना को पाने के लिए कोरोना को पराजित कर के जय पाई है।“.

उम्मीद करती हूँ इस शुभ काम के लिए के लिए लॉग डाउन तोड़ने की गलती नहीं करोगे।“

दोनों की सम्मिलित हंसी में शहनाई की धुन की मिठास थी। हवा में फूलों की सुगंध के साथ सूर्योदय की लालिमा से आकाश रंग रहा था।

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